हरियाणा की इस सीट पर भाजपा चेहरे तो कांग्रेस मुद्दों के सहारे है। पांच बार जिंदल परिवार से सावित्री जिंदल जीत चुके हैं। भाजपा में हिसार से डॉ. कमल गुप्ता के अलावा सावित्री जिंदल, पूर्व मेयर गौतम सरदाना और तरुण जैन टिकट के प्रबल दावेदार हैं।
हरियाणा की सबसे हाॅट सीटों में शुमार हिसार में इस बार भाजपा चेहरों व कांग्रेस मुद्दों के सहारे मैदान में हैं। विधानसभा चुनावों में होने वाली हार-जीत राजनीतिक रूप से कद्दावर रहे जिंदल परिवार व भाजपा का राजनीतिक भविष्य तय करेगी। इस सीट से पांच बार जिंदल परिवार, जबकि पिछली दो बार से डॉ. कमल गुप्ता जीत रहे हैं।
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दोनों के लिए इस बार भाजपा को जीत दिलाना सबसे बड़ी चुनौती है। टिकट के लिए दोनों बड़े दावेदार भी हैं। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में हिसार एयरपोर्ट सबसे बड़ा मुद्दा था। चुनाव आचार संहिता लागू होने से महज कुछ दिन पहले ही हिसार एयरपोर्ट से छोटे हवाई जहाज की ट्रायल उड़ान शुरू की गई।
डॉ. कमल गुप्ता ने इसी साल हुए लोकसभा चुनाव में हिसार एयरपोर्ट को पूरी तरह से विकसित करने की घोषणा थी, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। नए बस अड्डे, इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की घोषणा पर भी कुछ नहीं हुआ। पार्किंग स्थल बनाना, कचरे का निस्तारण, यातायात सुचारू करने के लिए नई सड़कों का निर्माण, शहर को फाटक मुक्त बनाने के काम भी पूरे नहीं हो सके।
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बेसहारा पशु, सीवरेज की समस्या ज्यों की त्यों है। ये सब मुद्दे जनता की जुबां पर हैं और इनके समाधान के लिए शहर में अकसर प्रदर्शन भी हुए हैं। इन्हीं मुद्दों को जनता के बीच रख 9 बार इस सीट से जीत चुकी कांग्रेस पूरी ताकत लगाने में जुटी हैं।
भाजपा में हिसार से डॉ. कमल गुप्ता के अलावा सावित्री जिंदल, पूर्व मेयर गौतम सरदाना और तरुण जैन टिकट के प्रबल दावेदार हैं। वहीं, कांग्रेस से रामनिवास राड़ा, बजरंग गर्ग, अशोक मंगालीवाला, हनुमान ऐरन का नाम सबसे ऊपर है। आम आदमी पार्टी भी किसी अग्रवाल को ही मैदान में उतार सकती है। जजपा व इनेलो से अभी कोई नामचीन चेहरा सामने नहीं है।
राजनीति और व्यापार में अगुवाई वाला शहर, 13 साल सीएम सिटी रहा
चौधरी भजनलाल के समय करीब 13 साल तक हिसार को सीएम सिटी का गौरव मिल चुका है। पिछले दो दशक से शहर के विधायक को मंत्रिमंडल में भी हिस्सेदारी मिली है। स्टील नगरी के तौर पर पहचान रखने वाला हिसार व्यापारियों का शहर माना जाता है। शहर के साथ लगता अग्रोहा अग्रवाल समाज का सबसे बड़ा धाम है।
हर साल देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते है। खासतौर पर शरद पूर्णिमा पर लगने वाले मेले में सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है। अग्रवाल समाज का हिसार के बड़े हिस्से पर प्रभाव है। अधिकतर बड़े उद्योग अग्रवाल समाज के लोगों ने स्थापित किए हैं। यहां तैयार होने वाला स्टील 22 देशों में पहुंचता है। हिसार के बटन तथा कॉटन का भी 17 देशों में निर्यात हो रहा है।
जातिगत समीकरण : तीन जातियों में भी राजनीतिक जंग
180088 मतदाताओं वाली हिसार सीट पर अग्रवाल और पंजाबी मतदाता करीब 12-12 प्रतिशत हैं। तीसरे नंबर पर करीब 10 प्रतिशत सैनी समाज के मतदाता हैं। सबसे अधिक बार अग्रवाल समाज के विधायक बने हैं। एक प्रतिशत से भी कम मतदाताओं वाले जैन समाज से भी एक बार विधायक बना है।
एक बार लोकदल की टिकट पर सैनी समाज से भी विधायक चुना गया। कारोबार में भी अग्रवाल समाज के साथ-साथ पंजाबी तथा बनिया समाज का भी हिस्सा है। छोटे कारोबार में पंजाबी, अनाज मंडी-सब्जी मंडी में सैनी समाज भी बराबर का हिस्सेदार है।
कारोबार में बड़ी भागीदारी रखने वाली तीनों जातियों में राजनीतिक जंग भी रहती है, ऐसे में सभी प्रमुख दल इन तीन जातियों के उम्मीदवारों को ही टिकट देना पहली प्राथमिकता रखते हैं। इनके अलावा जाट, ब्राह्मण, बिश्नोई व राजपूत मतदाताओं की संख्या भी ज्यादा है।
अब तक कौन रहा विधायक
1967 स्नेहलता कांग्रेस
1968 बलवंत तायल भारतीय क्रांति दल
1972 गुलाब सिंह जैन कांग्रेस
1977 बलवंत तायल जनता पार्टी
1982 ओमप्रकाश महाजन निर्दलीय
1987 हरि सिंह सैनी लोकदल
1991 ओपी जिंदल हविपा
1996 ओमप्रकाश महाजन निर्दलीय
2000- ओपी जिंदल कांग्रेस
2005 ओपी जिंदल कांग्रेस
2005 उपचुनाव सावित्री जिंदल कांग्रेस
2009 सावित्री जिंदल कांग्रेस
2014 -डॉ. कमल गुप्ता भाजपा
2019 डॉ. कमल गुप्ता भाजपा