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Hisar News: माटी में उगा दिया मुनाफा, हुनर ने बदली तकदीर

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कृषि मेले में लगे स्टाल पर लौकी का हलवा बेचते सुधीर।
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हिसार। कृषि मेले में प्रगतिशील किसान और लघु उद्यमी खेती और हुनर के दम पर आत्मनिर्भरता की नई राह दिखा रहे हैं। पारंपरिक खेती और रोजगार के सीमित विकल्पों से आगे बढ़कर किसी ने ड्रैगन फ्रूट की खेती से 40 लाख रुपये से अधिक का कारोबार खड़ा किया तो किसी ने देशी विधि से तैयार रासायनिक पदार्थों से मुक्त खाद्य उत्पादों को बाजार तक पहुंचाकर पहचान बनाई। मेले में पहुंचे किसानों और उद्यमियों ने उत्पादों के साथ अपनी सफलता की कहानी भी साझा की।
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ड्रैगन फ्रूट की पैदावार ने दिलाई ख्याति
फतेहाबाद के भट्टू कलां क्षेत्र के गांव दामर निवासी किसान सुनील ने कोरोना काल में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। उन्होंने बताया कि कोरोना के दौरान कारोबार और रोजगार के अधिकांश साधन प्रभावित हो गए थे। ऐसे समय में परिवार से लाखों रुपये लेकर तीन एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। सोशल मीडिया से जानकारी लेकर बिना किसी विशेष प्रशिक्षण के खेती का प्रयोग किया। शुरुआत में चुनौतियों और मंदी का दौर भी आया लेकिन धीरे-धीरे खेती का विस्तार होता गया। आज ड्रैगन फ्रूट की खेती का उनका कारोबार 40 लाख रुपये से अधिक का हो चुका है। प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें दो बार पुरस्कार देकर सम्मानित किया जा चुका है। मेले में उनकी ड्रैगन फ्रूट की पौध किसानों के आकर्षण का केंद्र रही। किसानों ने पौध खरीदने में काफी रुचि दिखाई। सुनील ने कहा कि किसानों और युवाओं को पारंपरिक खेती के साथ नए विकल्पों पर भी ध्यान देना चाहिए। बाजार में मांग वाली फल और सब्जियों की फसलों का चयन किया जा सकता है। उनके अनुसार ड्रैगन फ्रूट की मांग भारत के साथ विदेशों में भी है।
जहरमुक्त मिठाइयों के कारोबार ने बदली जिंदगी
पानीपत के चमरारा निवासी सुधीर कुमार ने लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए रासायनिक पदार्थों से मुक्त खाद्य उत्पाद तैयार करने का काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य लोगों को देशी विधि से तैयार ऐसे खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाना था, जिनमें रासायनिक सामग्री का इस्तेमाल न हो। इसके बाद उन्होंने अचार, मुरब्बा, देशी खांड से तैयार मुरब्बा, आंवले का मुरब्बा, एलोवेरा का रस और आंवला कैंडी जैसे उत्पाद तैयार कर बेचने शुरू किए। सुधीर कुमार ने बताया कि अब इन उत्पादों की देशभर में आपूर्ति की जा रही है और लोग इन्हें पसंद भी कर रहे हैं। मेले में देशी घी और देशी खांड से तैयार लौकी का हलवा विशेष आकर्षण रहा। इसकी कीमत 600 रुपये प्रति किलो है और मेले में लोगों ने इसे हाथोंहाथ खरीदा।
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सुधीर कुमार के अनुसार देशी विधि से तैयार उत्पादों के कारोबार ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है। उनका प्रयास लोगों को स्वाद के साथ अपेक्षाकृत प्राकृतिक और पारंपरिक खाद्य विकल्प उपलब्ध करवाना है।
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