हरपथ का मोबाइल एप अब निजी एजेंसी की बजाए हरसेक को सौंपा गया है। हरसेक को एक महीने में इसे पूरा करने का टारगेट दिया गया है। पहले इसे पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर हिसार में अपनाया जाएगा।
डीसी निखिल गजराज की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में प्रोजेक्ट को अब हरियाणा रिमोट सेंसिंग सेंटर (हरसेक) को सौंपने का फैसला लिया गया। मीटिंग में एसडीएम परमजीत सिंह चहल, जिला सूचना अधिकारी एपमी कुलश्रेष्ठ, हरसेक के चीफ साइंटिस्ट आरएस हुडडा , पीडब्ल्यूडी के एक्सईन, एसडीओ सहित अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। जनवरी महीने में यह काम शुरू किया गया था। फिर इसे निजी कंपनी को सौंप दिया गया था। निजी कंपनी ने इस एप को बनाने के लिए 56 लाख रुपये मांगे। बाद में कंपनी इसे 50 लाख रुपये में करने को तैयार हो गई थी। सीएम के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. राकेश गुप्ता ने करीब दस दिन पहले मीटिंग ली थी। जिसमें इस प्रोजेक्ट को लेकर भी रिव्यू किया गया था। अब प्रोजेक्ट में हो रही देरी को खत्म करने के लिए डीसी ने इसे हरसेक से कराने का फैसला लिया है। सोमवार को डीसी निखिल गजराज ने हरपथ- ईरोड प्रोजेक्ट को हरसेक को सौंप दिया। हरसैक इसे एक महीने में पूरा कराएगा। जिस पर करीब 10 से 12 लाख रुपये खर्च आने का अनुमान लगाया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए पीडब्ल्यूडी की ओर से फंड का प्रावधान किया जाएगा।
इस मोबाइल एप को 31 मार्च तक पूरा किया जाना था। जिसमें अब तक करीब 10 प्रतिशत ही काम पूरा हो सका है। निजी कंपनी को मोबाइल एप तैयार करने का काम सौंपने के बाद इसमें काम नहीं हो सका। अब 90 प्रतिशत काम को एक महीने में पूरा करने की चुनौती है। हरसैक की ओर से इसी सप्ताह इस पर काम शुरू किया जाएगा।
हरसेक को यह काम सौंपा गया है। हम एक महीने के तय समय में इसे पूरा करने का प्रयास करेंगे। इसके लिए अतिरिक्त मैनपावर लगाएंगे।इस एप के जरिए लोग खराब सडकों की शिकायत अपने मोबाइल से ही कर सकेंगे।
- आरएस हुडडा, चीफ साइंटिस्ट, हरसैक, हिसार।