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Hisar News: हल षष्ठी आज, संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाएगा व्रत

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हिसार। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाया जाने वाला हल षष्ठी पर्व इस बार 2 सितंबर को मनाया जाएगा। संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना से माताएं निर्जला व्रत रखेंगी। इस पर्व को हलछठ, हरछठ और ललई छठ के नाम से भी जाना जाता है।
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इसे भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम की जयंती के रूप में भी मनाने की परंपरा है। पंडित श्याम के अनुसार यह पर्व संतान के प्रति मां के स्नेह और उसकी मंगलकामना से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत है।

पंचांग के अनुसार षष्ठी तिथि 2 सितंबर को सुबह 6:12 बजे से शुरू होकर 3 सितंबर सुबह 4:25 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार हल षष्ठी का पर्व 2 सितंबर को ही मनाया जाएगा। इस दिन माताएं संतान के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना से व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगी। कई महिलाएं अन्न और जल का त्याग कर निर्जला व्रत रखती हैं।
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सात प्रकार के अनाज से लगाया जाएगा भोग

हल षष्ठी की पूजा में सात प्रकार के अनाज का विशेष महत्व माना गया है। पूजा के दौरान छठी माता को जौ, मक्का, धान, गेहूं, चना, मूंग, सेमी और अरहर की दाल अर्पित की जाती है। इसके साथ पारंपरिक विधि से पूजा कर संतान के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना की जाती है। परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा की विधि में कुछ अंतर हो सकता है।

सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होगी पूजा

हल षष्ठी की विशेष पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में करने की परंपरा है। 2 सितंबर को सूर्यास्त करीब शाम 6:42 बजे होगा। इसके बाद प्रदोष काल में पूजा की जा सकेगी। मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धा के साथ छठी माता और भगवान बलराम की पूजा करने से संतान के लिए मंगलकामना पूरी होती है। पूजा के बाद माताएं संतान के सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करेंगी। भगवान बलराम का प्रमुख अस्त्र हल माना जाता है, इसलिए षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व का नाम हल षष्ठी पड़ा। ग्रामीण और पारंपरिक परिवारों में इस दिन खेतों में हल चलाने और खेती से जुड़े कार्यों से दूरी रखने की भी परंपरा रही है। मान्यता के अनुसार माताएं संतान की रक्षा और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना से यह कठिन व्रत करती हैं। निसंतान महिलाएं भी संतान प्राप्ति की कामना से व्रत रखकर पूजा-अर्चना करती हैं। इस तरह हल षष्ठी आस्था, मातृत्व और संतान के प्रति मंगलभावना का पर्व है।
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