हांसी। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए उपमंडल में 45 निगरानी टीमें गठित की गई हैं। खेतों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी, ताकि फसल अवशेष न जलाए जाएं। एसडीएम राजेश खोथ ने कहा कि फसल अवशेषों (पराली) के उचित प्रबंधन के लिए किसानों को राज्य सरकार द्वारा 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इससे पहले यह राशि 1000 रुपये थी।
अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक
एसडीएम सोमवार को लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह में कृषि, राजस्व, पशुपालन व पंचायत विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस योजना का लाभ लेने के लिए ''मेरी फसल मेरा ब्यौरा'' पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। इसके अलावा पंजीकृत गोशालाओं को धान की पराली उठाने पर 15 हजार रुपये तक की सहायता राशि दी जाएगी। एक गोशाला अधिकतम 30 एकड़ क्षेत्र की पराली का उठान कर सकती है।
पराली से आमदनी का अवसर
एसडीएम ने कहा कि पराली किसानों के लिए आमदनी का एक अतिरिक्त स्रोत बन सकती है, यदि उसका सही तरीके से प्रबंधन किया जाए। इसके लिए प्रशासन हरसंभव सहयोग देगा। हांसी खंड में 22 कस्टम हायरिंग सेंटर संचालित हैं, जहां से किसान कम किराए पर कृषि यंत्र प्राप्त कर सकते हैं। बेलर मशीनों की भी कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। वहीं, बिना एसएमएस (स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम) युक्त कोई भी कंबाइन मशीन चलने की अनुमति नहीं होगी। कृषि विभाग ने बताया कि क्षेत्र की लगभग सभी कंबाइन मशीनें अब एसएमएस युक्त हो चुकी हैं, लेकिन इन पर निगरानी जारी रहेगी।
सूचना के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के निर्देश
एसडीएम ने कृषि विभाग को निर्देश दिए कि विभाग से जुड़ी सभी योजनाओं और कस्टम हायरिंग सेंटर की जानकारी के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाए ताकि किसानों तक सभी सूचनाएं आसानी से पहुंच सकें। एसडीएम ने कहा कि उपमंडल क्षेत्र में किसी भी सूरत में फसल अवशेष नहीं जलने दिया जाएगा। गांवों में शिविर आयोजित कर किसानों को फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के बारे में जागरूक किया जाएगा।