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पालकों का पशुओं के प्रति बढ़ रहा प्रेम, लुवास में 8 साल में दोगुनी हुई ओपीडी

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हिसार। अपने पालतू पशु को परिवार को हिस्सा मानने वाले लोग उन्हें उपचार दिलाने के लिए चिकित्सीय सुविधा दिलाने में जागरूक हो रहे हैं। लाला लाजपत राय पशु विज्ञान एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय (लुवास) की पशु चिकित्सा ओपीडी पिछले आठ साल में दोगुनी हो गई है। हर साल 18 हजार पशुपालक अपने पशुओं को उपचार के लिए ला रहे हैं। गर्मी के मौसम में पशु हीट स्ट्रोक, बुखार, हार्ट अटैक की चपेट में आ रहे हैं। अत्याधिक बुखार के कारण पशुओं की मौत भी हो जाती है। उपचार के बाद पशुओं को हालत गंभीर होने पर उन्हें भर्ती कर लिया जाता है। पशुओं को 20 से 25 लीटर ग्लूकोज चढ़ाया जाता है।
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लुवास की पशु चिकित्सा ओपीडी में वर्ष 2014 में 7 हजार ओपीडी होती थी। अब ओपीडी की संख्या 15 से 16 हजार के बीच पहुंच चुकी है। जिसमें सबसे अधिक संख्या भैंस, कुत्ता, घोड़ा, गाय, बकरी, भेड़, ऊंट होते हैं। लुवास में इन पशुओं को भर्ती करने के लिए वार्ड भी उपलब्ध है। भैंस में सबसे अधिक बीमारी थनैला रोग को लेकर आती है। कुत्तों में सबसे अधिक डिस्टेंपर बीमारी उनके दिमाग से कंट्रोल खत्म होने की होती है। इसमें वह कांपने लगता है। इसके अलावा उन्हें खूनी दस्त की बीमारी भी अधिक होती है। लुवास में पशुओं के छोटे ऑपरेशन का खर्च भी 500 रुपये होता है। प्रदेश के अलग अलग हिस्सों के अलावा राजस्थान, पंजाब के कुछ लोग भी पशुओं को यहां लेकर पहुंचते हैं।
घोड़ों को गैस की समस्या
आर्मी, हरियाणा पुलिस, एनसीसी, आईटीबीपी, बीएसएफ के घोड़ों को उपचार के लिए लुवास लाया जाता है। घोडों के पेट में गैस की समस्या सबसे अधिक मिलती है। दाना पेट में फूलने की वजह से यह बीमारी बनती है। ऐसे केस रात के समय अधिक आते हैं। अल्ट्रासाउंड के बाद चिकित्सक इसकी पहचान कर उन्हें उपचार देते हैं।
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वन्य जीवों को भी दे रहे उपचार...
कुछ लोग अब वन्य जीवों नीलगाय, हिरण, खरगोश, कछुआ को भी उपचार के लिए ला रहे हैं। इसमें सड़क हादसों में घायल होने के मामले अधिक होते हैं। पशु चिकित्सा अधिकारी उन्हें उपचार देने के बाद वापस जंगल में छुड़वाते हैं।
इस समय भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। अपने पालतू पशुओं को गर्मी से बचाएं। पशुओं को सुबह 9 बजे से पहले ओपीडी में लाएं। गर्मी के मौसम में खुले वाहन में उन्हें लाने से लोहे के वाहन में पशु गर्मी, बुखार की चपेट में आ जाते हैं। पशुओं को अभी नई तूड़ी न खिलाएं। ऐसा होने से पशु अस्वस्थ हो सकता है।
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डॉ. नीलेश सिंधु, सोशल मीडिया इंचार्ज, लुवास
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