हिसार। एचएयू ने गवर्नमेंट कॉलेज की 10 एकड़ से अधिक जमीन पर 40 वर्षों से कब्जा किया हुआ है। यही नहीं एचएयू के पास इस्टेट का भारी-भरकम पूरा विभाग है, लेकिन फिर भी एचएयू ने इस जमीन पर भवन तक खड़े कर दिए। वहीं, गवर्नमेंट कॉलेज प्रशासन को इस बारे में तब पता लगा जब किसी अन्य विभाग ने कॉलेज से जमीन की मांग की। अब तक न जमीन के असली मालिक का न गवर्नमेंट कॉलेज को पता था और न ही कब्जाधारी एचएयू को। तहसील से जमीन के सारे आंकड़े निकलवाकर पटवारी से जमीन की पैमाइस करवाई गई तो 10 एकड़ 3 कनाल 10 मरला जमीन एचएयू में निकली।
साढ़े 41 एकड़ जमीन थी गवर्नमेंट कॉलेज के पास
गवर्नमेंट कॉलेज के पास 41 एकड़ 4 कनाल और 1 मरला भूमि थी, लेकिन हाल ही में बने एस्ट्रोटर्फ मैदान के लिए इसमें से 10 एकड़ 2 कनाल और एक मरला जमीन दे दी गई थी। कॉलेज के पास अब करीब 31 एकड़ 2 कनाल जमीन बची थी। इसके बाद फिर कई लोगों द्वारा गवर्नमेंट कॉलेज से विभिन्न कार्यां के लिए जमीन मांगी गई। तब कॉलेज प्रशासन ने इंकार कर अपनी जमीन को सुरक्षित करने के लिहाज से इसकी पैमाइस करवाई और नक्शा निकलवाया। तो कुछ और ही सामने आया।
ग्राउंड के साथ लगती जमीन पर कब्जा कर बना दी इमारतें
गवर्नमेंट कॉलेज के ग्राउंड के साथ लगती जमीन पर एचएयू ने वर्षों पहले अपनी चारदिवारी निकाल ली और बिना किसी पैमाइस के 10 एकड़ 3 कनाल और 10 मरला जमीन को अपने घेरे में ले लिया। यही नहीं इस जमीन पर इमारतें भी बना दी गईं। जमीन पर एचएयू ने लुवास क्वार्टर और लुवास अस्पताल बनाए हुए हैं। वहीं, कुछ जमीन पर जंगल खड़ा है।
1976 में स्थानांतरित हुआ था कॉलेज
गवर्नमेंट कॉलेज की स्थापना 1950 में हुई थी। यह शहर के बीचो बीच था (जहां आज पुराना गवर्नमेंट कॉलेज मैदान है) इसके बाद 1976 में कॉलेज अपने नए कैंपस में स्थानांतरित हो गया। बताया गया कि नए कैंपस में स्थापना के समय 48 एकड़ जमीन थी, लेकिन उसमें से कुछ जमीन पंचायत भवन को दे दी गई थी। जिसके बाद कॉलेज के पास साढ़े 41 एकड़ के करीब जमीन रह गई थी।
वर्जन
हमने उच्चतर शिक्षा विभाग और एचएयू के कुलपति को पत्र लिख दिया है। एचएयू प्रशासन से हमारी करीब साढे़ 10 एकड़ जमीन को हैंडओवर करने को कहा गया है, ताकि कॉलेज की एक्सटेंशन को लेकर हमें कोई परेशानी न आए।
-एमएल गोयल, प्राचार्य, गवर्नमेंट कॉलेज हिसार।