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जिले में अश्व प्रजाति के सभी पशुओं के आवागमन पर तीन महीने का बैन, शादियों में भी नहीं जाएंगी घोड़ियां

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केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान। (फाइल फोटो) - फोटो : Hisar
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शहर में पांच घोड़ियों में ग्लैंडर्स की बीमारी मिलने के बाद पशुपालन विभाग ने जिले के अश्व प्रजाति के सभी पशुओं के जिले से बाहर व भीतर आवागमन पर रोक लगा दी है। अश्व प्रजाति के पशुओं में घोड़े, घोड़ियां, गधे, खच्चर आदि पशु शामिल हैं। इस दौरान जिले में होने वाली शादियों में भी घोड़ियों का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। वहीं, तीन महीने तक किसी भी तरह के पशु मेले पर भी रोक रहेगी। पशुपालन विभाग ने इसके लिए जिला प्रशासन को भी पत्र लिख जिले को ग्लैंडर्स ग्रसित नोटिफाई कर दिया है।
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पशुपालक को 25 हजार रुपये प्रति घोड़ी दिया जाएगा मुआवजा
पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डीएस संधू के अनुसार भारत सरकार की गाइडलाइन के तहत एहतियात बरती जाएगी। इसके लिए विभाग के डॉक्टरों की टीम बना दी गई है। वहीं, वीरवार को घोड़ों को मारने के लिए दवाइयों का बंदोबस्त करने के बाद शुक्रवार को वैैैज्ञानिक विधि से मार दिया जाएगा। वहीं, पशुपालक को नियमानुसार 25 हजार रुपये प्रति घोड़ी मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे।
दवाई पर है बैन, कंपनी को लिखा
ग्लैंडर्स से संक्रमित घोड़ों को मारनेे के लिए विशेष दवाई पैंटाथायजोल का इस्तेमाल किया जाता है। यह दवाई बैन है। इसलिए विभाग ने एक कंपनी को विशेष रूप से यह दवाई तैयार करके भेजने के लिए पत्र लिखा है। वीरवार को यह दवाई आ जाएगी और शुक्रवार को घोड़ों को मारा जाएगा।
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चूने के साथ गहरे गड्ढों में दफनाई जाएंगी, निगम को जेसीबी के लिए लिखा पत्र
केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैैज्ञानिक और पशुपालन विभाग के डॉक्टर घोड़ियों को बिना दर्द के इंजेक्शन देंगे। वैैज्ञानिक पीपीपी किट पहनकर यह प्रक्रिया शुरू करेंगे। कुछ ही क्षण में घोड़ियों की मौत के बाद उन्हें किसी एकांत स्थान पर गहरे गड्ढे खोदकर चूने के साथ दफना दिया जाएगा। पशुपालन विभाग ने नगर निगम को जेसीबी के लिए भी लिख दिया है।
पांच किलोमीटर के क्षेत्र में होगी घोड़ों की जांच
जिले में घोड़ियों में ग्लैंडर्स के मामले शहर के बीचोबीच सैनियान मोहल्ले में मिले हैं। ऐसे में क्षेत्र के पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले अश्व प्रजाति के सभी पशुओं के सैंपल लिए जाएंगे। तीन महीने तक हर महीने इन पशुओं के सैंपल लिए जाएंगे। अगर इस जांच में किसी पशु में यह बीमारी नहीं मिली तो तीन माह बाद जिले को डि-नोटिफाई कर दिया जाएगा, लेकिन अगर कोई केस पॉजिटिव मिलता है तो विभाग नियमानुसार जांच का दायरा बढ़ाकर 10 किलोमीटर कर देगा। अगर फिर भी ग्लैंडर्स का कोई केस मिलता है तो 25 किलोमीटर के क्षेत्र में आने वाले अश्व प्रजाति के पशुओें की जांच होगी।
तीन माह पहले रोहतक से आई घोड़ी में ग्लैंडर्स मिलने के कारण नोटिफाई था जिला
जिले में पिछले तीन माह से घोड़ियों व अश्व प्रजाति के अन्य पशुओं के आवागमन पर रोक लगाई हुई थी। तीन माह पहले रोहतक से हिसार लाई गई एक घोड़ी में ग्लैंडर्स मिला था। जांच के दौरान घोड़ी कुछ दिन यहां रही थी और ग्लैंडर्स की पुष्टि होने के बाद घोड़ी को मार दिया गया था। इसके बाद पशुपालन विभाग ने जिले को एहतियातन अस्थायी तौर पर जिले को ग्लैंडर्स ग्रसित नोटिफाई किया था। इसे अभी तीन महीने बीते ही थे कि अब फिर से ग्लैंडर्स के एक साथ पांच मामले हिसार में सामने आ गए हैं।
2018 में तीन घोड़ियों में मिला था ग्लैंडर्स
इससे पहले वर्ष 2018 में भी जिले में ग्लैंडर्स बीमारी ने अपने पैर पसार लिए थे। तब तीन घोड़ियों में ग्लैंडर्स हुआ था, लेकिन दो की मौत के बाद पशुपालक ने उन्हें पहले ही दफना दिया था, जबकि एक घोड़ी को बाद में वैज्ञानिक विधि से मारा गया था।
पांच घोड़ियों में ग्लैंडर्स की पुष्टि हुई है। शुक्रवार को वैज्ञानिक विधि से घोड़ियों को मारा जाएगा। नियमानुसार जिले को ग्लैंडर्स ग्रसित घोषित करके टीमों का गठन कर दिया है।
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- डॉ. डीएस संधू, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग हिसार

फाइल फोटो।- फोटो : Hisar

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