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पांच घोड़ियों में मिले खतरनाक बीमारी ग्लैंडर्स के वायरस, वैज्ञानिक तरीके मारा जाएगा

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शहर के सैनियान मोहल्ले में एक पशुपालक की पांच घोड़ियों में खतरनाक बीमारी ग्लैंडर्स का वायरस मिला है। केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान हिसार द्वारा पशुपालन विभाग को भेजी गई रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है। अब इन घोड़ियों को निर्धारित वैैैज्ञानिक तरीकों से बिना दर्द के जहर देकर मारा जाएगा और जमीन में दफनाया जाएगा। केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. बीएन त्रिपाठी के दिशा निर्देशन में वैज्ञानिक डॉ. हरीश सिंघा की टीम द्वारा ग्लैंडर्स के सैंपल लिए गए थे।
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ये वो घोड़ियां हैं, जिनका इस्तेमाल शादियों में दूल्हे को बैठाने के लिए किया जाता था। ऐसे में ग्लैंडर्स की पुष्टि के बाद पशुपालन विभाग, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक सकते में आ गए हैं। गनीमत रही कि घोड़ियों के संपर्क में आने वाले स्वयं पशुपालक की प्रारंभिक जांच में वह स्वस्थ है। हालांकि अगले कुछ माह तक हर 15वें दिन केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर घोड़ियों के साथ रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य की गहनता से जांच करेंगे।
यह होता है ग्लैंडर्स
ग्लैंडर्स घोड़ों में पाया जाने वाला एक खतरनाक वायरस है, जिसका कोई इलाज नहीं है। इस बीमारी में घोड़ों को सांस लेने में तकलीफ होती है और उनका शरीर सूखने लगता है। इसके अलावा नाक से खून बहना, शरीर पर फोड़े या गांठ आदि हो जाना भी इसके लक्षण हैं। यह बीमारी बरखेडेरिया मैलियाई नामक जीवाणु से फैलती है। एक घोड़े में यह बीमारी होने के बाद उसके साथ रहने वाले अन्य पशुओं में भी यह सांस, त्वचा, एक ही बर्तन में पानी पीने या चारा खाने आदि से तेजी से फैलती है। ग्लैंडर्स होने के बाद घोड़ों को वैज्ञानिक तरीके से मारना ही पड़ता है।
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मनुष्यों में भी आसानी से होता है इसका प्रभाव
ग्लैंडर्स से प्रभावित घोड़ों के संपर्क में रहने वाले लोगों में भी ग्लैंडर्स का वायरस आसानी से आ जाता है। जो लोग घोड़ों की देखभाल करते हैं, उनको त्वचा, नाक, मुंह, सांस आदि के द्वारा संक्रमण हो जाता है। इंसानों में इस बीमारी के आने से मांसपेशियों में अकड़न, दर्द, छाती में दर्द, सिरदर्द, नाक से पानी बहना आदि लक्षण हो सकते हैं।
ऐसे लगा था मामले का पता
सैनियान मोहल्ले निवासी एक पशुपालक की एक घोड़ी बीमार हो गई थी, जिसे लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के क्लीनिक में चेकअप के लिए ले जाया गया। डॉक्टरों ने उसका इलाज किया, लेकिन बाद में उस घोड़ी की मौत हो गई। इसके बाद एक और घोड़ी की तबीयत बिगड़ी तो पशुपालक उसे भी लुवास के क्लीनिक में लेकर गया। वहां, एक घोड़ी की मौत की बात और उसी तरह के लक्षण दूसरी घोड़ी में होने के बाद डॉक्टरों को शक हुआ तो उन्होंने केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों को सूचित किया। संस्थान के वैज्ञानिकों ने मौके पर जाकर घोड़ी के सैंपल लिए। ग्लैंडर्स की आशंका को देखते हुए वैज्ञानिकों ने पशुपालक की चार अन्य घोड़ियों के भी सैंपल लेकर एहतियात बरतने के निर्देश दिए। इस बीच स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पशुपालक का भी स्वास्थ्य चेक किया।
घोड़ियों की जांच के लिए पशुपालन विभाग को लिखा पत्र
केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लैंडर्स वायरस का पैर पसारना गंभीर बात है। यह जरूरी है कि शहर की सभी घोड़ियों के सैंपल लिए जाएं। इसके लिए पशुपालन विभाग को पत्र लिख दिया गया है। उनके साथ मिलकर सैंपल लिए जाएंगे। अगर ग्लैंडर्स के और भी मामले मिले तो उनके संपर्क में आने वाले लोगों की भी जांच की जाएगी।
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