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सपना था आईपीएस बनना, मुश्किलें आईं तो अजू ई-रि-क्शा चला बनीं परिवार का सहारा

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अजू - फोटो : Hisar
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हिसार। दो भाई और दो बहनों में तीसरे नंबर की अजू ने विपरीत परिस्थितियों में भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। घर का खर्च चलाना मुश्किल हुआ तो उन्होंने खुद ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। अब अजू ई-रिक्शा चलाकर न केवल परिवार का खर्च चला रही हैं, बल्कि वह दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुकीं। 22 वर्षीय अजू महाबीर कॉलोनी में रहती हैं। पिता कैलाश चंद्र हलवाई की दुकान पर काम करते हैं, जबकि माता सीमा गृहिणी हैं।
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अजू ने बताया कि उसका सपना तो आईपीएस बनने का था, मगर परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह 8वीं कक्षा से आगे नहीं पढ़ पाई। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक करने के लिए खुद भी मदद करने की सोची और एक साड़ी के शोरूम पर काम करना शुरू कर दिया, मगर वहां 11 घंटे की ड्यूटी करने के बाद भी महीने के मात्र 3500 रुपये मिलते थे, जिससे आर्थिक हालात ज्यों के त्यों रहे। उसके बाद अजू ने सोचा कि कहीं नौकरी करने की बजाय खुद का काम शुरू किया जाए। इसमें परिवार का सहयोग मिला तो अजू ने ई-रिक्शा लिया। अजू ने बताया कि लॉकडाउन से पहले तक वह ई-रिक्शा चलाकर 20 से 25 हजार रुपये महीना कमा रही थी, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति काफी सुधर गई थी। अब कोरोनाकाल के चलते काम काफी कम हो गया तो कमाई भी घट गई है। हिसार में ई-रिक्शा चलाने वाली एकमात्र बेटी अजू कहती हैं कि उसने हिम्मत नहीं हारी और अब काम फिर से बढ़ने लगा है।
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