सामान्य अस्पताल में भगवान (डॉक्टर) एक बार फिर कठोर हो गए। खून की कमी की शिकार गर्भवती अस्पताल में दो दिन तक अपनी डिलीवरी करवाने और अपने अजन्मे बच्चे की जान बचाने के लिए गुहार लगाती रही, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा।
अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए उसे अग्रोहा और हिसार के बीच रेफर किया जाता रहा। लाडवा ईंट भट्ठे पर काम करने वाली प्रसूता हीरामणि को लेकर परिजन निजी अस्पताल में भी गए, लेकिन वहां खर्चा इतना बता दिया गया कि जो उनकी पहुंच से बाहर था। आखिरकार अग्रोहा मेडिकल में जाकर ही महिला ने बच्चे को जन्म दिया। इससे अस्पतालों के बीच तालमेल और चिकित्सकों की ड्यूटी के प्रति जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
महिला हीरामणि के ससुर ने बताया कि उसका बेटा बुद्धविलास काम से बाहर गया हुआ है। बहू को शनिवार को दर्द शुरू हुए थे। वे उसे सामान्य अस्पताल लेकर आए। डॉक्टरों ने उसे कहा कि महिला में केवल 5 ग्राम खून है। उसका बी नेगेटिव ग्रुप का ब्लड यहां नहीं है।
वहीं, ब्लड बैंक स्टाफ का कहना है कि ब्लड को मौजूद था। चेकअप करने के बाद शनिवार को उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। यहां भी उसे इलाज नहीं मिला। सरकारी इलाज न मिलने पर महिला को किसी निजी अस्पताल में हिसार में भर्ती करवाया गया।
निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने इलाज के लिए अधिक रुपये मांगे। परिजनों के पास इतने रुपये नहीं थे। रविवार को फिर परिजन महिला को सामान्य अस्पताल लेकर आए। इस बार महिला के साथ गीता नाम की आशा वर्कर भी थी। महिला को ऑटो रिक्शा से सामान्य अस्पताल लाया गया। मौके पर मौजूद लेडी डॉक्टर ने उसे फिर रेफर कर दिया।
रविवार दोपहर बाद करीब 12:30 बजे महिला को उसके सास-ससुर आटो में सामान्य अस्पताल के मैटरनिटी वार्ड में लेकर आए। नर्स ने ड्यूटी पर मौजूद महिला डॉक्टर से फोन पर बात की। डॉक्टर ने बिना देखे ही उसे दोबारा रेफर करने की बात कही।
महिला अस्पताल के मुख्य गेट पर आधा घंटे तक चिल्लाती रही कि मेरे बच्चे को बचा लो डॉक्टर साहब! मेरा यह पहला बच्चा है, इसे बचा लो! परिजनों ने कहा कि उनकी बहू को बिना चेकअप के ही डॉक्टर ने फोन पर कह दिया कि उसे रेफर कर दो। इतनी जगह धक्के खाने के दौरान बीच रास्ते में कुछ भी हो सकता था।
सामान्य अस्पताल के प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर डॉ. दयानंद ने कहा कि डॉक्टर उसे लगातार दो दिन से किस स्थिति में रेफर कर रहे थे, मामले की जांच होगी। पीएमओ ने कहा कि उन्हें प्राथमिक सूचना में जो जानकारी मिली है कि महिला का खून पांच ग्राम था।
अग्रोहा मेडिकल में रेफर के बाद उसे वापस भेजा गया और फिर यहां से दोबारा रेफर किया गया। पूरे मामले की जांच होगी। उन्होंने बताया कि महिला की अग्रोहा में स्वस्थ डिलीवरी हो गई है। जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।
इन सवालों का चाहिए जवाब
- अस्पताल में सीजेरियन और ब्लड की सुविधा, फिर क्यों किया गया महिला को रेफर
- अस्पताल के ब्लड बैंक में बी नेगेटिव खून भी उपलब्ध, फिर क्यों नहीं चढ़ाया गया खून
- दो दिन से लगातार क्यों कटवाए जा रहे थे महिला के चक्कर, बीच रास्ते में हादसे का कौन होता जिम्मेदार
- रेफर करने की स्थिति में एक संस्थान से दूसरे संस्थान के डॉक्टरों में कोई तालमेल क्यों नहीं बनाया गया
पहले भी लापरवाही के चलते हो चुकी है मौत
सामान्य अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से पहले सिवानी की कैलाशो देवी की मौत हो चुकी है। दरअसल कैलाशो देवी को उसके परिजनों ने 23 मई को सामान्य अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती करवाया था। डॉक्टरों ने उसे सीमा विवाद के चलते इलाज नहीं दिया और भर्ती नहीं किया। महिला घंटे भर अस्पताल के मुख्य गेट पर कराहती रही। बाद में उसकी मौत हो गई थी।