आजाद हिंद फौज में रहकर देश की आजादी के लिए अंग्रेजी सेना से टक्कर लेने वाले स्वतंत्रता सेनानी फूल सिंह ग्रेवाल का शनिवार को निधन हो गया हो गया।
दिन का दौरा पड़ने से उनका निधना हुआ। वह 99 वर्ष के थे। नायब तहसीलदार ने जवानों के साथ राजकीय सम्मान के साथ देर शाम कुंभा में उनका अंतिम संस्कार किया।
1915 में फूल सिंह ग्रेवाल ने सिसाय के राजकीय उच्च विद्यालय से शिक्षा ग्रहण की थी। वह 16 फरवरी 1940 को अंबाला सेना मुख्यालय में भर्ती हुए। उन्हें पहली नियुक्ति सेना के तोपखाना में दी गई।
ग्रेवाल के पुत्र रिटायर्ड कैप्टन बलजीत ने बताया कि पिता ने सेना की नौकरी में रहते हुए करीब एक वर्ष तक अंग्रेजों के साथ काम किया। जिस वक्त देश में आजादी के लिए बिगुल बजा तो उन्होंने अंग्रेजी सेना के खिलाफ विद्रोह कर दिया। वह सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आईएनए में शामिल हो गए थे।
1941 से 1942 तक जेल में रहे। जापान के साथ युद्ध के दौरान उन्होंने सिंगापुर की जेल भी काटी थी। फूल सिंह ग्रेवाल ने बाद में शिक्षा के क्षेत्र में भी काम किया तथा प्रौढ़ शिक्षा केंद्र चला कर बुजुर्गों को शिक्षित किया।
उनके अंतिम संस्कार के दौरान गांव के सरपंच किताब सिंह, कानूनगो नरेंद्र कुमार के अलावा काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।