हिसार। फ्लिपकार्ट के पे-लेटर खाते का कथित गलत इस्तेमाल कर 1 लाख 7 हजार 563 रुपये के ऑर्डर किए जाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग हिसार ने फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का जिम्मेदार माना है।
आयोग ने कंपनी को 20 हजार 322 रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत लौटाने, 10 हजार रुपये मुआवजा और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के आदेश दिए हैं। आदेश की पालना 45 दिन में करनी होगी। यह फैसला अध्यक्ष जगदीप सिंह, सदस्य रजनी गोयत और डाॅ. अमिता अग्रवाल की पीठ ने 9 सितंबर 2026 को सुनाया।
गांव कोखा निवासी किसान ओमप्रकाश ने शिकायत में बताया कि उनके पे-लेटर खाते की सीमा 90 हजार रुपये थी। 2 से 5 सितंबर 2023 के बीच किसी अज्ञात व्यक्ति ने खाते से कई ऑर्डर किए। उनके मोबाइल पर कोई ओटीपी नहीं आया। नोटिफिकेशन से जानकारी मिलने पर उन्होंने 10 सितंबर को फ्लिपकार्ट को शिकायत दी। कस्टमर केयर ने ऑर्डर रद्द होने और दो-तीन दिन में राशि लौटने की बात कही, लेकिन पूरी राशि वापस नहीं हुई। बाद में 7120 रुपये की ईएमआई जमा कराने का नोटिस मिला। उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर भी शिकायत की।
सुनवाई में आयोग ने पाया कि कंपनी के लिखित जवाब पर अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर और शपथपत्र नहीं था। कंपनी यह भी नहीं बता सकी कि 21 हजार 172 रुपये की कथित खरीद में क्या सामान खरीदा गया और किस पते पर पहुंचाया गया। आयोग ने शिकायतकर्ता के दस्तावेजी साक्ष्यों को पर्याप्त माना।
आयोग के अनुसार, 20 हजार 322 रुपये पर नौ प्रतिशत ब्याज लगेगा। इसमें 9768 रुपये पर 18 दिसंबर 2024 और 10 हजार 554 रुपये पर 5 फरवरी 2025 से ब्याज देय होगा। 45 दिन में आदेश की पालना नहीं होने पर डिफॉल्ट अवधि के लिए ब्याज 12 प्रतिशत वार्षिक हो जाएगा।