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चार और घोड़ियों को मारा, अगले पांच दिन में पांच किमी. क्षेत्र की घोड़ियों के लिए जाएंगे सैंपल

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जहरीला इंजेक्शन देने से पहले घोड़ियों के साथ वैज्ञानिक। - फोटो : Hisar
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सैनियान मोहल्ले में ग्लैंडर्स से ग्रसित चार और घोड़ियों को शनिवार को मार कर दफना दिया गया। पशुपालन विभाग के डॉक्टरों के समझाने पर पशुपालक अपने घर से घोड़ियां धांसू रोड पर निर्धारित स्थान पर ले गया और उन्हें वैैज्ञानिक विधि से जहरीला इंजेक्शन देकर मार दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की गंभीर बीमारी में किसी भी तरह का रिस्क नहीं लिया जा सकता। किसी भी हाल में घोड़ियों को मारा जाना जरूरी था। इस दौरान पशुपालन विभाग के डॉक्टर और केेंद्रीय अश्व अनुसंधान के वैज्ञानिक मौजूद रहे। वहीं, शनिवार को पशुपालन विभाग के डॉक्टरों की गठित की गईं 20 टीमों ने अश्व प्रजाति के पशुओं के सैंपल लेने शुरू कर दिए हैं। सैंपल लेने की प्रक्रिया अगले चार से पांच दिन में पूरी हो जाएगी।
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मुआवजा राशि बढ़ाने के लिए उपायुक्त से मिलेंगे पशुपालक
दूसरी तरफ पशुपालकों ने कहा कि एक घोड़ी के 25 हजार रुपये कम हैं। ऐसे में पैसे बढ़ाए जाने चाहिए। वहीं, पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. डीएस संधू ने कहा कि पशुपालक को भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार 25 हजार रुपये प्रति घोड़ी ही दिया जा सकता है। सोमवार को पशुपालक का बैंक अकाउंट आने के बाद राशि उनके खाते में डाल दी जाएगी। पशुपालकों ने कहा कि राशि बढ़ाने के लिए वे उपायुक्त से मिलेंगे।
शुक्रवार को सिर्फ एक ही घोड़ी को मारा जा सका था
ग्लैंडर्स की चपेट में आई पांच घोड़ियों में से शुक्रवार को सिर्फ एक घोड़ी को ही मारा जा सका। घोड़ी रखने वाला पशुपालक सिर्फ एक ही घोड़ी को लेकर पहुंचा था और उसने अन्य चार घोड़ियों को मरवाने से इनकार कर दिया था। पशुपालकों ने घोड़ियों के मुआवजे के लिए दी जाने वाली राशि को बढ़ाने की मांग की थी। इसके बाद पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें समझाया और शनिवार को घोड़ियों को मारा जा सका। इस बीमारी के आने के बाद पशुपालन विभाग को अब पांच किलोमीटर के दायरे के अश्व प्रजाति के सभी पशुओं के सैंपल लेकर जांच करनी है।
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घोड़ी खरीदने से पहले करवाएं खून की जांच
केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. हरिशंकर सिंघा ने कहा कि पशुओं के मामले में अभी लोगों को बहुत अधिक जागरूक होने की जरूरत है। अगर कोई पशुपालक घोड़ी खरीदता है तो वह बीमार घोड़ी या घोड़ा बिल्कुल न खरीदें। अगर बीमार घोड़ी ग्लैंडर्स से पीड़ित निकली तो फिर पशुपालक के अन्य घोड़ों में भी यह बीमारी फैल जाएगी। पशुपालक केंद्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान में फ्री में घोड़ी के खून के सैंपल की जांच करवा सकता है। ऐसे में पशुपालक की अन्य घोड़ियां भी बच जाएंगी।
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