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जलते फाने बने मुसीबत, कोविड के बीच बढ़ा सांसों पर संकट

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हिसार। जिले में लगातार जलाए जा रहे गेहूं के फाने स्वयं किसानों और अन्य लोगों के लिए गले की फांस बन रहे हैं। इससे लगातार पर्यावरण में घुलता धुआं कोविड संकट के बीच मरीजों की सांसों पर संकट पैदा कर रहा है।
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यही नहीं, अप्रैल में ही तीन स्थानों पर गेहूं के फाने जलाए जाने से पास के खेतों में गेहूं में आग लग चुकी है, हालांकि किसान और अधिकारी खेतों में लगी आग का कारण स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी तरफ, कोविड संकट के बीच खेतों में जलते फानों का धुआं सांस के मरीजों की परेशानी बढ़ा रहा है।
जिले में लगातार बढ़ रहे कोविड संकट के बीच वातावरण भी बेहद खराब स्थिति की ओर बढ़ रहा है। पिछले 10 दिनों में ही जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक 58 से बढ़कर 309 पर पहुंच गया है। जिले में लगातार बढ़ रहा प्रदूषण लोगों विशेषकर कोविड के मरीजों को सांस लेने में भी दिक्कतें पैदा कर रहा है।
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पिछले 10 दिनों में यूं बढ़ा वायु गुणवत्ता सूचकांक
दिनांक एक्यूआई
30 अप्रैल 309
29 अप्रैल 238
28 अप्रैल 264
26 अप्रैल 213
25 अप्रैल 132
24 अप्रैल 108
23 अप्रैल 158
22 अप्रैल 112
21 अप्रैैल 54
धुएं से होगी परेशानी
धूआं और धूल वैसे तो सभी के लिए हानिकारक है, लेकिन सांस के मरीजों के लिए यह परेशानियां बढ़ा रहा है। कोविड के सामान्य मरीज तो फिलहाल के प्रदूषण स्तर को झेल सकते हैं, लेकिन जिनके फेफड़ों में अधिक दिक्कतें हैं, उन्हें सांस लेने में परेशानियां बढ़ रही हैं। ऐसे में लोग खुली चीजों से परहेज करें और गर्म पानी पीते रहें। गले या सांस में थोड़ी भी दिक्कत होने पर भाप भी लें। इसके लिए सुनिश्चित करें कि मुंह पर मास्क ठीक ढंग से लगा हो।
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- डॉ. ज्ञानेंद्र, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल हिसार।
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