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Hisar News: बुढ़ापे में बचपन सा एहसास, परीक्षा के लिए दिखा उल्लास, जिले के 376 परीक्षा केंद्रों में 21990 लोगों को देनी थी परीक्षा, 2418 रहे अनुपस्थित

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चमारखेड़ा गांव में उल्लास की परीक्षा देते बुजुर्ग। 
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हिसार। रविवार को यूं तो स्कूलों में अवकाश था, लेकिन परीक्षा देने के लिए बच्चों की जगह उम्रदराज महिला-पुरुषों की चहल-पहल से नजारा ऐसा था मानो कोई प्रतियोगी परीक्षा है। 35 से 85 साल तक के लोगों में परीक्षा का उल्लास ठीक बच्चों जैसा ही था। ताज्जुब इस बात का रहा कि जो लोग स्वयं आने में सक्षम नहीं थे, उनमें गजब का उत्साह दिखा, लेकिन जो 35 से 50 के बीच थे, उन्हें फोन कर बुलाना पड़ा। कई बुजुर्ग अपने पोतों के साथ तो कई बेटों संग परीक्षा देने पहुंचे। शिक्षा विभाग की ओर से साक्षरता के लिए उल्लास परीक्षा का आयोजन करवाया गया था। जिले के 376 केंद्रों पर 21990 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इनमें से 2418 अनुपस्थित रहे।
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शहर में 63 परीक्षा केंद्र बनाए गए। परीक्षार्थी तय समय से 30 मिनट पहले साढ़े 9 बजे परीक्षा केंद्रों पर पहुंचना शुरू हो गए। 70 से 80 साल तक के परीक्षार्थियों के चहरों पर संकोच के भाव नहीं थे। उनमें साक्षरता परीक्षा देने के लिए इस बात का उत्साह था कि अब वे अधिकृत तौर पर साक्षर हो जाएंगे। लेकिन मन में एक टीस भी थी कि बचपन में ही पढ़ाई कर लेते तो आज सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अंगूठा नहीं लगाना पड़ता।

बुजुर्ग महिला की आंखों में आ गए आंसू
गंगवा स्थित पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में 31 से 45 साल तक की महिलाएं भी परीक्षा देने पहुंचीं। 60 से 85 साल के उम्र के परीक्षार्थी खुश दिखाई दिए। आजाद नगर निवासी 85 वर्षीय ओमपत्ती की आंखों में आंसू थे। प्रश्न-पत्र हल करते समय उनकी बचपन की यादें ताजा हो गईं थीं। यह देखकर शिक्षकों ने उनके साथ हंसी-मजाक करना शुरू कर दिया।
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पहली बार स्कूल आई सुखदेवी
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डाबड़ा में 60 बुजुर्ग महिलाओं ने परीक्षा दी। इन्होंने उम्र के इस पड़ाव में परीक्षा देकर खुशी का इजहार किया। 80 वर्षीय सुखदेवी ने कहा कि आज हमारे लिए खुशी का ठिकाना नहीं है, क्योंकि हम कभी विद्यालय नहीं गए। स्कूल आकर परीक्षा देना हमारे लिए सौभाग्य की बात है।
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रोजगार न मिलने का आज भी मलाल
सातरोड खुर्द स्थित राजकीय प्राइमरी स्कूल में करीब पौने 12 बजे तक एक ही परीक्षार्थी परीक्षा देने पहुंचा। आखिर शिक्षकों ने घर-घर दौड़ लगाई। इसके बावजूद 8 ही लोगों ने परीक्षा दी। जबकि इस केंद्र पर 80 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। सातरोड खुर्द निवासी 35 वर्षीय अमित ने बताया कि वह पांचवीं पास है और दिव्यांग भी है। रोजगार की चाह में दर-दर भटक रहा है। उल्लास परीक्षा की योजना अच्छी है, अब हस्ताक्षर करने सीख गया हूं। पढ़ और लिख लेता हूं।

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95 में से 22 परीक्षार्थी ही पहुंचे
सातरोड खुर्द के राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय में दोपहर 12 बजे तक 22 परीक्षार्थी पहुंचे। जबकि 95 पंजीकृत थे। यहां भी शिक्षकों को परीक्षार्थियों से संपर्क करना पड़ा। मॉडल टाउन स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 7 परीक्षार्थी ही पहुंचे, जिनकी उम्र 35 से 55 साल के बीच थी। यहां 125 से अधिक परीक्षार्थियों को परीक्षा देनी थी। जहाजपुल चौक के पास स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 150 में से 9 परीक्षार्थी ही पहुंचे। यहां परीक्षार्थियों को लाने के लिए रोजगार व वजीफा आदि दिलाने का प्रलोभन देना पड़ा।
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यह है उल्लास परीक्षा

उल्लास योजना का उद्देश्य किसी भी आयु वर्ग के पुरुष व महिला को साक्षर करना है। निरक्षरों का चयन करने के बाद परिवार के एक सदस्य को शिक्षा विभाग की ओर से वॉलंटियर बनाया जाता है, उसकी देखरेख में परिवार के उस सदस्य को साक्षर किया जाता है। शब्दों व अक्षरों की पहचान करना सिखाया जाता है। वॉलंटियर के काम की निगरानी पास के सरकारी स्कूल के शिक्षकों की होती है। परीक्षा में पास परीक्षार्थियों को शिक्षा विभाग की ओर से साक्षर होने का प्रमाण-पत्र दिया जाता है।
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कुल पंजीकृत परीक्षार्थी 21990

उपस्थित रहे 19572
अनुपस्थित रहे 2418


कहां कितने लोगों ने दी परीक्षा
ब्लॉक परीक्षार्थी
अग्रोहा 1620
आदमपुर 1528
बरवाला 3032
बास 4234
हिसार प्रथम ब्लॉक 1527
हिसार द्वितीय खंड 1428
हांसी प्रथम ब्लॉक 1334
नारनौंद ब्लॉक 3237
उकलाना ब्लॉक 1632
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