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उल्टी-दस्त के डर से बच्चों ने छोड़ा स्कूल जाना

Mon, 16 May 2016 12:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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उल्टी-दस्त के डर से बच्चों ने छोड़ा स्कूल - फोटो : bureau
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खंड के भाणा गांव में मौसम ने अपना मिजाज दिखाना शुरू कर दिया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग जागरूक नजर नहीं आ रहा है। गांव में पिछले एक सप्ताह से उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी रोष है।
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ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि लगातार बढ़ रही बीमारी की तरफ ध्यान दिया जाए, वरना ग्रामीण पीएचसी केंद्र को ताला जड़ने का मजबूर होंगे। बलवंत सिंह, धोलूरा, रामसिंह, विद्या देवी, अंगूरी देवी, लीला ने बताया कि इस समय गांव में लगभग 60-65 मरीज बीमारी से ग्रस्त हैं, जो निजी अस्पतालों में अपना उपचार करा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार यहां तक कि गांव में शनिवार को रिछपाल नामक व्यक्ति की उल्टी-दस्त से मौत भी हो चुकी है।

गांव में लगातार बढ़ रही उल्टी-दस्त की बीमारी के डर से स्कूलों में बच्चों ने जाना भी बंद कर दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों को दिखाने के लिए जाते हैं तो स्टाफ जवाब देता है कि यहां कोई चिकित्सक और दवाई नहीं है। प्राइवेट अस्पताल में ले जाओ। यहां पर कोई इलाज करने वाला नहीं है। फार्मासिस्ट का पद तो कई महीनों से रिक्त पड़ा है।
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उल्टी दस्त से गांव में भय : सरपंच
भाणा के सरपंच संजय कुमार खीचड़ ने बताया कि गांव में उल्टी-दस्त की बीमारी का प्रकोप है। उल्टी-दस्त से रिछपाल की मौत के बाद भय बना हुआ है। गांव के अनेक लोग निजी अस्पतालों में उपचार करवा रहे हैं। विभाग को भी अवगत कराया गया है। सोमवार को ग्रामीण डीसी और सिविल सर्जन से मुलाकात करेंगे।

मेरे सामने अभी तक कोई ऐसी शिकायत नहीं आई है। अगर ऐसा मामला है तो विभाग की टीम पहुंचकर मरीजों का उपचार करेगी। अग्रोहा पीएचसी पर कोई भी भाणा गांव से उल्टी-दस्त का मरीज नहीं पहुंचा है। हो सकता है दूषित पानी के पीने या गर्मी से उल्टी-दस्त शुरू हो गए होंगे।
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डॉ. सुनील भट्टी, एमओ अग्रोहा पीएचसी
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