हिसार। सपने देखना और अभावों के बावजूद उन्हें साकार करने का जुनून हो तो सफलता कदम चूमने लगती है। उमरा की तीरंदाज बेटी भावना के जिद, जज्बे और संघर्ष की कहानी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा हो सकती है। परिवार के कमजोर आर्थिक हालात के बावजूद भावना ने तीरंदाजी में कॅरिअर बनाने का सपना देखा और आज नेशनल प्रतियोगिताओं में कई पदक जीत चुकी हैं।
भावना बताती हैं कि तीरंदाजी महंगे खेलाें में शामिल हैं। रिकर्व धनुष की कीमत तो तीन लाख रुपये से शुरू होती है। परिवार की माली हालत के कारण कई खिलाड़ी धनुष तक नहीं खरीद पाते। वह खुशनसीब हैं कि पिता ने हौसला दिया।
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आटा चक्की चलाकर परिवार का भरण पोषण कर रहे पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि धनुष दिला सके। बेटी के सपनों को पंख लगाने के लिए उन्होंने तीन लाख का कर्ज लेकर धनुष दिलाया, जिसके बाद बेटी ने लक्ष्य पर निशाना साधा। भावना उमरा के तीरंदाजी सेंटर में कोच मनजीत मलिक के पास अभ्यास कर रही हैं।
कोच मनजीत मलिक ने बताया कि भावना पंजाब की गुरु काशी यूनिवर्सिटी की ओर से खेली थी। तीरंदाजी सेंटर पहुंचने पर भावना का स्वागत किया जाएगा। भावना ने छह साल पहले तीरंदाजी से अपने कॅरिअर की शुरुआत की थी। जब वह सातवीं कक्षा में थी तो पास में ही तीरंदाजी सेंटर में लड़कियों को निशाना लगाते देखकर उसने भी तीरंदाज बनने की ठान ली और अभ्यास करना शुरू कर दिया। अब उत्तराखंड में 27 जनवरी से होने वाले नेशनल गेम्स में हिस्सा लेंगी। संवाद