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फफककर पिता बोला, डॉक्टर साहब ! मेरा कोई नहीं बेटी का गर्भपात करा दो

Thu, 25 Sep 2014 10:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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डॉक्टर साहब, मेरी बेटी का गर्भपात यहीं करवा दीजिए। कोर्ट की अनुमति भी है और हम भी गर्भपात करवाना चाहते हैं। हम रोहतक मेडिकल नहीं जा सकते।
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वैसे भी मैं उजड़ चुका हूं। वहां हमारा कोई नहीं है। अस्पताल में बेटी के पास भी मैं अकेला रह रहा हूं मेरी पत्नी घर संभाल रही है।

यह गुहार लगाते हुए बरवाला क्षेत्र में हुए दुराचार पीड़ित नाबालिग लड़की के पिता सामान्य अस्पताल में पीएमओ (प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर) डॉ. दयानंद के सामने फफक-फफक कर रो पड़े और डॉक्टर के पैरों में गिर गए।

बोल्रे- साहब, मेरा कोई नहीं है या तो आप मेरी मदद कर सकते हो या फिर भगवान! पीड़ित परिवार मौजूद हालात में पहले ही परेशान है, जबकि सामान्य अस्पताल की व्यवस्था उसे और मानसिक परेशानी दे रही है।
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आज बुलाएंगे गांव के मौजिज लोगों को
पीड़ित लड़की के पिता का कहना है कि वह परेशानी में है। कोई उसकी मदद नहीं कर रहा। डॉक्टर से बातचीत करने के लिए शुक्रवार को वह गांव के मौजिज लोगों को बुलाएंगे, ताकि कोई समाधान निकल सके।

पिता का कहना है कि वह डॉक्टरों के सामने हाथ-पांव तक जोड़ चुके हैं। करीब एक सप्ताह से अस्पताल में उसकी बेटी दाखिल है, लेकिन डॉक्टर कोर्ट के आदेशों को भी नहीं मान रहे।

पिता के मुताबिक, डॉक्टरों ने कहा है कि कोर्ट ने इसमें क्लीयर नहीं लिखा है कि पीड़िता का गर्भपात करवाया जाए।

यहां है पेंच
कोर्ट ने गर्भपात करवाने के लिए ऑर्डर में लिखा है कि कानून के मुताबिक (एज फॉर लॉ ) पीड़िता का गर्भपात करवाया जाए।

गर्भपात संबंधी कानून में लिखा गया है कि 12 सप्ताह की प्रेगनेंसी एक डॉक्टर की देखरेख में करवाई जा सकती है। अगर 12 से 20 सप्ताह तक की प्रेगनेंसी को गिराना हो तो कम से कम 2 डॉक्टरों की टीम करेगी।

इसके अलावा अगर 20 सप्ताह से ज्यादा का बच्चा होगा तो क्या होगा, इसके लिए कानून के तहत कोई निर्देश नहीं है। पीड़िता के वकील वरिष्ठ अधिकवक्ता लाल बहादुर खोवाल का कहना है कि स्थानीय डॉक्टर इसी को पेंच बता रहे हैं, क्योंकि पीड़िता का गर्भ 23 सप्ताह का है।

हालांकि अगर डॉक्टर चाहे तो गर्भपात कर सकते हैं, जब बच्ची उस स्थिति में नहीं है कि वह बच्चे को जन्म दे सके।  

ये हो सकता है आगे
कानून के हिसाब से अगर डॉक्टर पीड़िता का गर्भपात नहीं करते तो पीड़ित परिवार अपर कोर्ट में अर्जी लगा सकते हैं।

स्थानीय डॉक्टर अगर उसे रोहतक रेफर कर रहे हैं तो वहां भी गर्भपात नहीं हो पाएगा? क्योंकि यहां के डॉक्टर अगर कानूनी पेंच बता रहे हैं तो पीजीआई रोहतक में जाने पर कानून बदल नहीं जाएगा।

पीड़िता परिवार को दोबारा कोर्ट की शरण लेनी पड़ सकती है। ऐसा करने के दौरान गर्भ और अधिक विकसित होगा, जिससे पीड़िता के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है अथवा उसे अधिक परेशानी उठानी पड़ सकती है।
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पीड़िता को रोहतक रेफर किया जा सकता है। कुछ कानूनी अड़चनें हैं। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कहूंगी। इस बारे में पीएमओ साहब ही बता पाएंगे। -डॉ. अनिता बंसल, स्त्री रोग विशेषज्ञ।


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