नारनौंद (हिसार)। गांव कोथ कलां निवासी किसान नेता सुरेश कोथ ने नारनौंद सीआईए स्टाफ की ओर से भेजे गए पुलिस नोटिस का कानूनी नोटिस के माध्यम से कड़ा जवाब दिया है। सुरेश कोथ ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें बिना किसी ठोस कारण के भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 172(1) के तहत नोटिस भेजा, जिसमें “दबंगई” जैसे गंभीर आरोप लगाए गए और बिना किसी सुनवाई के उनकी संपत्ति, वाहन व बैंक खाते जब्त करने की धमकी दी गई। इसे उन्होंने न केवल कानून के खिलाफ, बल्कि नागरिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया है।
सुरेश कोथ की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा गया है कि सीआईए स्टाफ प्रभारी ने जारी किए नोटिस पूरी तरह से अवैध, अधिकार क्षेत्र से बाहर और धमकी भरा है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि धारा 172 बीएनएसएस केवल निवारक निर्देश देने का अधिकार देती है, न कि संपत्ति कुर्क करने या जब्ती की धमकी देने का। संपत्ति की कुर्की केवल न्यायालय के आदेश और विधि से निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही की जा सकती है। कानूनी नोटिस में यह भी कहा गया है कि बिना किसी साक्ष्य और सुनवाई का अवसर दिए “दबंगई” जैसा आरोप लगाना न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है और उन्हें मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। सुरेश कोथ ने इसे जानबूझकर डराने और दबाव बनाने की कार्रवाई बताया है। सुरेश कोथ ने अपने नोटिस में साफ तौर पर मांग रखी है कि पुलिस भेजे गए विवादित नोटिस तत्काल प्रभाव से वापस ले।
इसकी लिखित सूचना 7 दिन के भीतर दी जाए। इसके साथ ही, उन्हें हुई मानसिक पीड़ा और परेशानियों के लिए बिना शर्त लिखित माफी मांगी जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे कानूनी रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। नोटिस में आगे कहा गया है कि मांगें न मानने की स्थिति में संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी। उसने कहा कि मानहानि व उत्पीड़न के लिए सिविल केस दायर किया जाएगा, अवैध नोटिस को रद्द कराने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की जाएगी।