गोरखपुर किसान संघर्ष समिति ने मंगलवार को परमाणु संयंत्र के द्वार नंबर 1 के बाहर फिर से धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी गोरखपुर परमाणु संयंत्र के लिए अधिगृहित की गई जमीन का मुआवजा बढ़ाने और सर्वे में बकाया 3 करोड़ की मांग कर रहे हैं।
संघर्ष समिति के प्रधान हंसराज की अध्यक्षता में शुरू किए गए धरने में मंगलवार को मनीराम, साधड़, धर्मपाल शर्मा, सतबीर, ईश्वर शर्मा, बलवंत, जितेन्द्र और आजाद पहाड़ी सहित करीब दो दर्जन किसानों ने शिरकत की।
किसान नेता हंसराज सिवाच ने मांग की है कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को नई अधिग्रहण नीति के तहत मुआवजा मिलना चाहिए। जिन किसानों की सारी जमीन अधिगृहित हो गई है उनके परिवार में एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए।
मुआवजे के लिए जो 20 फीसदी सर्वे बकाया रह गया है, उसे पूरा किया जाए। वहीं इस धरने के विरोध में राजेश फौजी व रामफल प्रधान के नेतृत्व में दर्जनों किसान मंगलवार को उपायुक्त से मिले और आरोप लगाया कि अधिकारियों ने किसानों के साथ मिलकर सर्वे में करोड़ों रुपये का गोलमाल किया है।
परमाणु संयंत्र की जमीन पर किए गए सर्वे में 39 पाइप लाइन और 25 तालाब दिखाए गए हैं जबकि इसमें 100 फीसदी धांधली है। इन लोगों का कहना था कि धरना दे रहे किसान प्रधानमंत्री के दौरे का विपक्ष के साथ मिलकर विरोध करके नाजायज फायदा लेना चाहते हैं।
धरना विरोधी किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि मंगलवार शाम तक इनका धरना नहीं उठाया गया तो हम सभी किसान, जो सर्वे से वंचित रहे हैं, बुधवार से घोटाले की जांच को लेकर धरना देंगे। इन किसानों ने घोटाले की जांच के लिए उच्च न्यायालय जाने की बात भी कही है।
एडीसी ने सर्वे में धांधली की जांच शुरू की
अतिरिक्त उपायुक्त राजनारायण कौशिक ने परमाणुु संयंत्र के लिए अधिगृहित जमीन पर सर्वे में गड़बड़ी मामले की जांच मंगलवार को शुरू कर दी। एडीसी ने मंगलवार को सभी पक्षाें के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया के तहत सबसे पहले शिकायतकर्ता पक्ष को बुलाया। डीआरओ राम सिंह बिश्नोई ने सभी पक्षों के बयान दर्ज कर डीसी डॉ. साकेत कुमार को सौंपे थे। डीसी ने मामले की नियमित जांच एडीसी को सौंप दी है।
गोरखपुर के किसान राजेश फौजी व कुछ अन्य ने प्रशासन को शिकायत दी थी कि सर्वे में गड़बड़ी हुई है। फर्जी सर्वे के आधार पर कई किसानों को नाजायज फायदा पहुंचाया गया है। इसको लेकर डीसी डॉ. साकेत कुमार ने डीआरओ राम सिंह बिश्नोई को जांच सौंपी थी। डीआरओ ने सभी पक्षों के बयान दर्ज कर डीसी को रिपोर्ट सौंपी थी। डीसी ने एडीसी को जांच के आदेश दिए थे।