हिसार। साइबर ठगी की लगातार बढ़ती घटनाओं के बावजूद लोग लालच नहीं छोड़ रहे हैं। निवेश में मोटा मुनाफा, रुपये दोगुना करने, कभी टास्क के नाम पर तो कभी डिजिटल अरेस्ट के जरिए डर दिखाकर में शातिर ठग लोगों के खाते खाली कर रहे हैं। जिले में हर दिन ठगी की चार-पांच शिकायतें पुलिस के पास पहुंची रही हैं। ठग फर्जी लिंक, ओटीपी फ्रॉड, बैंक कॉल्स, केवाईसी अपडेट और नकली वेबसाइटों के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं और वे छोटी सी लापरवाही के कारण अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठते हैं। एएसपी मयंक मुदगिल ने कहा कि पीडि़त लोग संकोचवश पुलिस को समय पर सूचना नहीं देते और इस वजह से ठगों के खातों में ट्रांसफर की जा चुकी राशि की रिकवरी भी मुश्किल हो जाती है। ऐसे मामलों में पहले तो सतर्क रहें और ठगी हो जाए तो तत्काल पुलिस को सूचित करें।
केस 1
क्रिप्टो में मुनाफे का झांसा देकर किसान से 7.19 लाख ठगे
साइबर ठगों ने क्रिप्टो में ज्यादा मुनाफे का झांसा देकर सातरोड़ खुर्द के किसान से 7 लाख 19 हजार रुपये ठग लिए। सातरोड़ खुर्द निवासी व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि 22 मार्च को फेसबुक पर पूजा बंसल के नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। बातचीत के बाद नंबर एक्सचेंज हुए। पूजा ने खुद को लंदन में इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कारोबारी बताया। बातों-बातों में उसने बताया कि वह क्रिप्टो करेंसी का काम करती है। इसमें अच्छी खासी कमाई हो जाती है। पूजा की बातों पर विश्वास कर उसने भी क्रिप्टो करेंसी का काम करने की हां भर दी। पूजा ने बताया कि उसके बॉस अंकित वर्मा ट्रेडिंग टिप्स देंगे लेकिन बदले में कमाई का 30 फीसदी कमीशन देना होगा। झांसे में आकर उसने 18 अप्रैल को आईडीबीआई खाते में 1.32 लाख रुपये भेजे। इसके बाद कमीशन के नाम पर एक्सिस बैंक के खाते में 59 हजार, एसबीआई के खाते में 1.53 लाख, एसबीआई के एक और खाते में 80 हजार और फेडरल बैंक के खाते में 2.95 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। इस तरह 7.19 लाख रुपये भेजने के बाद पूजा ने मैसेज करना बंद कर दिया। जिस फेसबुक आईडी से बात हुई थी वह भी डिलीट हो चुकी है। साइबर थाने से जांच अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। ऐसे मामलों में ठगी का एहसास होती ही तत्काल पुलिस को सूचना करनी चाहिए।
केस 2
दुकानदार को फर्जी मैसेज भेजकर 50 हजार ठगे
उकलाना में साइबर ठग ने एक दुकानदार को 66 हजार रुपये का फर्जी मैसेज भेजा और कहा कि गलती से ज्यादा पैसे भेज दिए। दुकानदार ने जल्दबाजी में ठग को ऑनलाइन 50 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। दुकानदार ने बैंक बैलेंस चेक किया तो उसे ठगी का पता चला। उकलाना की धर्मशाला गली निवासी मंयक सिंगला ने पुलिस को बताया कि उसका फूड आइटम का व्यापार है। 1 फरवरी को वह अपनी दुकान पर बैठा था तो उसे राहुल शर्मा नाम के व्यक्ति का फोन आया। उसने कहा कि उसे किसी काम के लिए 100 पेटी पानी की जरूरत है। आप रेलवे स्टेशन पर भिजवा दीजिये। वहां आपको पानी का भुगतान कर दूंगा। दुकानदार पानी लेकर रेलवे स्टेशन पहुंचा। वहां राहुल शर्मा के नंबर पर कॉल की लेकिन फोन नहीं उठाया। कुछ देर बाद राहुल का फोन आया और उसने उसका बैंक खाता नंबर मांगा। कुछ देर बाद मोबाइल पर दो मैसेज आए। पहला बैंक खाते में 10 रुपये और दूसरा 66,650 रुपये प्राप्त होने का आया। सके बाद राहुल शर्मा का दोबारा फोन आया और कहा कि गलती से उसने 16650 रुपये की जगह 66650 रुपये भेज दिए है। इस पर उसने आरोपी के दिए क्यूआर कोड पर 50,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए। शक होने पर बैलेंस चेक किया तो वह 50 हजार रुपये कम मिला। जांच अधिकारी सौरभ ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फर्जी इंस्टाग्राम प्रोफाइल बना सस्ते आईफोन देने का देते थे झांसा
साइबर थाना पुलिस ने ठगी के आरोप में 13 मई को बहबलपुर निवासी लक्की व सौरभ को गिरफ्तार किया।आरोपियों ने खुलासा किया कि वे फर्जी इंस्टाग्राम प्रोफाइल बनाकर लोगों को सस्ते आईफोन देने का झांसा देते थे। कोई व्यक्ति संपर्क करता था तो उससे पहले 100 रुपये बुकिंग राशि, बाद में डिलीवरी एवं अन्य बहानों से अलग-अलग बैंक खातों में पैसे डलवा लेते थे। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे किसी को भी वास्तविक मोबाइल फोन नहीं भेजते थे और केवल ठगी कर रकम हड़प लेते थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए दूसरे व्यक्तियों के नाम पर ली गई सिम का प्रयोग करते थे। इस तरह दोनों ने पिछले दो साल में करीब 500 लोगों को 6 लाख रुपये की चपत लगाई।
पुलिस विभाग ने जारी की एडवाइजरी
पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने बताया कि साइबर अपराधी नित नए तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।साइबर थाना पुलिस की एडवाइजरी की पालना करनी चाहिए।
- अनजान लिंक पर क्लिक न करें
- व्हाट्एसप, एसएमएस या ईमेल पर आए किसी भी संदिग्ध लिंक को बिना जांचे न खोलें।
- ओटीपी या बैंक डिटेल किसी से साझा न करें। बैंक, पुलिस या कोई सरकारी एजेंसी कभी फोन पर ओटीपी, एटीएम पिन या सीवीवी नहीं मांगती।
- फर्जी कॉल और वीडियो कॉल से सावधान रहें। पुलिस अधिकारी”, सीबीआई व कस्टम ऑफिसर बनकर डराने वाले कॉल साइबर ठगी हो सकते हैं।
- सोशल मीडिया अकाउंट सुरक्षित रखें। मजबूत पासवर्ड रखें और दो स्तरीय सत्यापन चालू करें।
- ऑनलाइन खरीदारी में सावधानी बरतें। केवल भरोसेमंद वेबसाइट या एप से ही खरीदारी करें। एडवांस भुगतान सोच-समझकर करें।
- स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड न करें। एनी डेस्क व क्विक सपोर्ट जैसी एप किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर डाउनलोड न करें।
- यूपीआई भुगतान करते समय ध्यान रखें। पैसे प्राप्त करने के लिए पिन नहीं डालना पड़ता। पिन डालने का मतलब भुगतान करना होता है।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें:
राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन: 1930
- साइबर पोर्टल:
www.cybercrime.gov.in
पिछले एक माह में ठगी के प्रमुख मामले
13 मई: मर्चेंट नेवी अधिकारी को शेयर मार्केट में मोटे मुनाफे का झांसा देकर 52.78 लाख रुपये ठगे।
11 मई: फर्जी सोशल मीडिया आईडी के माध्यम से विदेश से पैसे भेजने का झांसा देकर ज्ञानपुरा निवासी व्यक्ति को 2.44 लाख रुपये की चपत लगाई।
3 मई: आर्य नगर निवासी युवक से सोशल मीडिया पर सस्ते एसी-इन्वर्टर का लालच देकर 31 हजार रुपये ठगे।
3 मई: सेक्टर 13 निवासी युवक से कंपनियों के उत्पादों को लाइक करने के टास्क के बहाने पर 3.36 लाख रुपये ठगे।
29 अप्रैल: शेयर मार्केट में निवेश का झांसा देकर 12 क्वार्टर निवासी युवक से 17.86 लाख रुपये ठगे।
22 अप्रैल: लांधड़ी के बुजुर्ग को एक करोड़ रुपये देने का लालच देकर 48 लाख रुपये ठगे।
22 अप्रैल: एक महिला को घर बैठे रुपये कमाने का लालच देकर 75 हजार रुपये ठगे।
22 अप्रैल: सातरोड निवासी व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड के रिडीम प्वाइंट बढ़ाने का लालच देकर 56 हजार रुपये ठगे।
20 अप्रैल: क्रेडिट कार्ड के रिवार्ड प्वाइंट बढ़ाने की बात कहकर सूर्य नगर निवासी महिला से 82 हजार रुपये ठगे।