पूूर्व डीएसपी भगवानदास की जांच रिपोर्ट के आधार पर हिसार के पूर्व डीसी एमएल कौशिक, पीए सतीश कुमार, एडीसी के पीए सुरेश शर्मा, कांट्रेक्टर राकेश गुप्ता के खिलाफ 10 लाख 65 हजार रुपये की रिश्वत का केस दर्ज किया गया है। ठेकेदार राकेश को 85 लाख रुपये का ऑर्डर देने के बदले यह रिश्वत ली गई थी। एमएल कौशिक फिलहाल सेकेंडरी एजुकेशन के डायरेक्टर के पद पर नियुक्त हैं।
डीएसपी की शिकायत पर सिविल लाइन थाना में हिसार के तत्कालीन डीसी एमएल कौशिक, पीए सतीश कुमार, एडीसी के पीए सुरेश शर्मा, कांट्रेक्टर राकेश गुप्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर है। इन सभी के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचने का भी केस दर्ज किया गया है। करीब एक माह पहले यह सिविल लाइन थाना में दर्ज इस एफआईआर को पुलिस ने पूरी तरह से छिपाने का प्रयास किया। अमर उजाला के पास एफआईआर की प्रति उपलब्ध है। डीसी हिसार रहते हुए एमएल कौशिक ने एक फर्म को 85 लाख 21 हजार रुपये का ऑर्डर दिया था। जिसमें डीसी व उसके स्टाफ को 10 लाख 50 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप है।
मधुबन लैब से सैंपल की रिपोर्ट के बाद दर्ज हुआ केस
डीएसपी भगवानदास ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस मामले की सबसे पहले जांच हांसी के एएसपी ने की थी। जिन्होंने रपट संख्या 33 दिनांक 6 जून 2016 थाना शहर हांसी में दर्ज कराई। हांसी की जेएमआईसी की अदालत ने आरोपी सतीश की आवाज के नमूने लेने के आदेश दिए। 19 जुलाई को आरोपी की आवाज के आदेश हुए। 1 अगस्त 2016 को आवाज का सैंपल लेकर मधुबन लैब में सैंपल की जांच कराई। जिसमें मधुबन लैब की ओर से 3 फरवरी 2017 को पत्र क्रमांक 16 पीएचवाई-4804 के जरिए बताया कि सीडी में रिकार्ड आवाज व सैंपल की आवाज एक ही व्यक्ति यानी सतीश कुमार की है।
इन धाराओं में हुआ मामला दर्ज
डीएसपी भगवानदास ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि आईजी कार्यालय के पत्र क्रमांक 14630 दिनांक 4 जून 2014 , रपट नंबर 33 दिनांक 6 जून 2016 थाना हांसी शहर के मजमून से प्राप्त शिकायत के आधार पर की गई जांच में सैंपल का मिलान होने के बाद दोष सिद्ध पाया गया है। जिसके आधार पर धारा 7, 8,10, 12,
13-1डी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 49 और 120 बी के तहत केस दर्ज किया गया है।
एमएल कौशिक पर सरकार की खास मेहरबानी
एचसीएस से पदोन्नत होकर आईपीएस बने थे। कुछ महीने पहले वह एजुकेशन डिपार्टमेंट में रिटायर हो गए थे। प्रदेश सरकार ने उन्हें एक्सटेंशन देते हुए उसी पद पर दोबारा से नियुक्त कर दिया। आईएएस को रिटायर होने के बाद उसी पद पर नियुक्त करने का प्रदेश का यह पहला मामला है।