हिसार। प्रदेश सरकार की तरफ से आबकारी व कराधान विभाग के पुराने लंबित मामलों के समाधान को लेकर वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) का मसौदा तैयार किया जा रहा है। उम्मीद है नए वित्त वर्ष में सरकार इसकी अधिसूचना जारी कर दे। वहीं व्यापारी व उद्योगपति मांग कर रहे हैं कि प्रदेश सरकार राजस्थान की तर्ज पर वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लेकर आए ताकि व्यापारी व उद्योगपति वर्ग को ज्यादा फायदा मिले और अधिक से अधिक मामलों का निपटान हो सके।
जीएसटी से पहले एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी, स्पेशल एडिशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम, सेल्स टैक्स यानी वैट, सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी), मनोरंजन कर, ऑक्ट्रॉय एंड एंट्री टैक्स, लग्जरी टैक्स आदि टैक्स लागू थे। बेशक जीएसटी को लागू हुए 7 साल हो चुके हैं, लेकिन पुराने टैक्स से जुड़े विवादित मामले आज भी लंबित पड़े हैं। इन मामलों में सरकार का करोड़ों रुपये का टैक्स भी फंसा है। इस कारण सरकार व करदाता दोनों को परेशानी हो रही है।
वर्ष 2023 में प्रदेश सरकार लेकर आई थी ओटीएस
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 31 दिसंबर 2023 को ओटीएस का शुभारंभ किया था। इस स्कीम के अनुसार जीएसटी कानून के लागू होने से पहले सात कर अधिनियमों को निपटाने के लिए चार श्रेणियों के तहत ब्याज व पेनल्टी में छूट दी गई थी, जिसमें स्वीकृत कर, विवादित कर, निर्विवाद कर और अंतरीय कर शामिल थे। स्कीम के तहत स्वीकृत कर का भुगतान करने से ब्याज व पेनल्टी की 100 प्रतिशत माफी का प्रावधान था।
विवादित कर के तहत 50 लाख रुपये तक देय कर राशि का 30 प्रतिशत और 50 लाख से ऊपर की राशि में 50 प्रतिशत कर भुगतान करने पर ब्याज व पेनल्टी की राशि पूरी माफ की जानी थी। निर्विवाद कर श्रेणी के तहत 50 लाख रुपये से कम या बराबर के मामले में मूल कर का 40 प्रतिशत व अन्य सभी मामलों में 60 प्रतिशत जमा करवाने और अंतरीय कर के तहत 30 प्रतिशत टैक्स राशि जमा करने पर ब्याज में 100 प्रतिशत माफी का प्रावधान था। प्रदेश सरकार ने यह स्कीम 90 दिनों के लिए लागू की थी।
ये है राजस्थान की स्कीम
- डीसीआर की सिंगल एंट्री में लंबित मांग राशि 50 लाख रुपये से कम है तो पूरा टैक्स, ब्याज, जुर्माना व लेट फीस माफ है। इसमें सरकार की तरफ से कोई शर्त नहीं लगाई गई है।
- लंबित मांग राशि घोषणा पत्र से संबंधित है तो उस स्थिति में आवेदक को इंटर स्टेट सेल के इनवॉयस की कॉपी व उनका ब्योरा और इन इनवॉयस के भुगतान का सबूत देना होगा। इस केस में आवेदक की टैक्स राशि का अंतर, ब्याज, जुर्माना व लेट फीस माफ हो जाएगी। यदि आवेदक के पास इंटर स्टेट सेल के सबूत नहीं है तो शर्त यह होगी कि टैक्स अंतर का 10 प्रतिशत जमा करवाना होगा। साथ ही आवेदक का टैक्स अंतर की बची हुई राशि, पूरा ब्याज, जुर्माना व लेट फीस भी माफ होगी।
- लंबित मांग राशि या विवादित राशि, जो ब्याज से संबंधित है और 25 करोड़ रुपये से ज्यादा है तो शर्त यह है कि आवेदक को 20 प्रतिशत ब्याज राशि जमा करवानी होगी। वहीं बची हुई ब्याज राशि के साथ आदेश की तारीख तक अर्जित ब्याज माफ होगा।
-लंबित मांग राशि या विवादित राशि उपरोक्त तीनों में कवर नहीं होती तो आवेदक को बची हुई टैक्स राशि, पूरी ब्याज राशि, जुर्माना, लेट फीस व आदेश की तिथि तक अर्जित ब्याज माफ होगा। मगर शर्त यह है कि आवेदक को 20 प्रतिशत ब्याज राशि जमा करवानी होगी।
टैक्स बार भी कर रही है प्रयास
वन टाइम सेटलमेंट स्कीम को व्यापारी व उद्योगपति वर्ग के अनुकूल बनवाने के लिए टैक्स बार एसोसिएशन भी प्रयासरत है। इसे लेकर वह जल्द ही मुख्यमंत्री से भी मुलाकात कर सकती है। एसोसिएशन भी राजस्थान की ओटीएस को सही ठहरा रही है।
पिछली ओटीएस में सरकार ने ज्यादा छूट नहीं थी, जिस कारण व्यापारियों व उद्योगपतियों ने इसमें ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। प्रदेश सरकार राजस्थान की तर्ज पर स्कीम लागू करे, जिससे ज्यादा से ज्यादा व्यापारी व उद्योगपति वर्ग को फायदा हो। - बजरंग गर्ग, अध्यक्ष, हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल।
ओटीएस ऐसी हो, जो व्यापारी व उद्योगपति वर्ग के अनुकूल हो। ज्यादा से ज्यादा व्यापारी व उद्योगपति इसका फायदा उठाएं। राजस्थान की स्कीम काफी बढि़या है। - मदनलाल, प्रधान, द हिसार स्मॉल स्केल इंडस्ट्री एसोसिएशन।