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Hisar News: 56 साल बाद भी राजगुरु मार्केट के 40 दुकानदार अपनी दुकानों के मालिक नहीं

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हिसार। करीब 56 साल पहले दुकान खरीदने के बावजूद राजगुरु मार्केट के करीब 40 व्यापारी आज तक अपनी दुकानों का मालिकाना हक हासिल नहीं कर पाए हैं। नगर सुधार मंडल की ओर से विकसित कॉमर्शियल मार्केट में दूसरी और तीसरी मंजिल बनाने वाले दुकानदारों की रजिस्ट्री (कन्वेयंस डीड) अटकी हुई है।
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व्यापारियों का आरोप है कि अधिकारी दूसरी-तीसरी मंजिल गिराने के बाद ही रजिस्ट्री करने की बात कह रहे हैं। व्यापारी जुर्माना भरने को तैयार हैं लेकिन सरकार की ओर से ऐसी कोई नीति नहीं बनाई गई है जिसके तहत वे जुर्माना देकर रजिस्ट्री करा सकें।
राजगुरु मार्केट के व्यापारी दर्शन खुराना ने बताया कि हिसार में नगर सुधार मंडल ने वर्ष 1970 में राजगुरु मार्केट विकसित की थी। इसमें 377 दुकानें काटी गई थीं। सभी दुकानें खुली बोली के माध्यम से बेची गई थीं। 27 गज की एक दुकान करीब 10 हजार रुपये तक में बिकी थी।
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नगर सुधार मंडल ने दुकानों की रजिस्ट्री कराने के लिए समय निर्धारित किया था। इसके अलावा दुकानदारों को रजिस्ट्री के बिना दुकान किसी दूसरे व्यक्ति को बेचने का विकल्प भी दिया गया था। इसके लिए प्रति गज 100 रुपये शुल्क जमा कराना होता था।
2010 तक बन गईं पहली से तीसरी मंजिल
दर्शन खुराना ने बताया कि वर्ष 1970 से 2010 तक बड़ी संख्या में दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर पहली, दूसरी और कुछ ने तीसरी मंजिल तक बना ली। करीब 15 साल पहले नगर सुधार मंडल ने इन दुकानों की रजिस्ट्री रोक दी।
अधूरी नीति में फंस गए करीब 40 दुकानदार
इसके बाद सरकार ने नई नीति लागू की। इसमें बेसमेंट, ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर तक बनी दुकानों को वैध करार देते हुए जुर्माना तय किया गया। दुकान निर्माण के समय से लेकर मंजूरी मिलने तक की अवधि के आधार पर जुर्माना निर्धारित किया गया। कई दुकानदारों ने लाखों रुपये जुर्माना अदा कर अपनी दुकानों की रजिस्ट्री करा ली। वहीं, राजगुरु मार्केट के करीब 40 दुकानदार ऐसे हैं, जिन्होंने दूसरी या इससे अधिक मंजिलें बना रखी हैं। वे इस योजना में शामिल नहीं हो सके और उनकी रजिस्ट्री नहीं हुई।
सीएम के आश्वासन के बाद भी नहीं बनी नीति
ऐसे दुकानदार तीन अप्रैल 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के खुले दरबार में पहुंचे थे। उन्होंने दूसरी-तीसरी मंजिलों के लिए भी जुर्माना तय कर रजिस्ट्री कराने की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में नीति बनाने का भरोसा दिया था। इसके बाद दुकानदार निगम आयुक्त से लेकर चंडीगढ़ के अधिकारियों तक गुहार लगा चुके हैं। अब तक नीति नहीं बन सकी है। दुकानदार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी अनुरोध कर चुके हैं। इसके अलावा सीएम विंडो और समाधान शिविर में भी शिकायत दी जा चुकी है।

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इस समस्या को लेकर हम निगम अधिकारियों से लेकर चंडीगढ़ तक के सभी अधिकारियों से मिल चुके हैं। दुकानदार जुर्माना भरने को तैयार हैं, लेकिन सरकार नीति बनाकर इसका जुर्माना भी नहीं ले रही। लाखों रुपये खर्च कर जिन लोगों ने दूसरी-तीसरी मंजिल बनाई है उन्हें इन्हें गिराने के लिए कहा जा रहा है। दुकानदार लाखों का नुकसान कैसे कर सकते हैं।
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- सुरेंद्र बजाज, प्रधान, राजगुरु मार्केट हिसार।
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