सिवानी मंडी। कृषि विभाग की ओर से मंगलवार को गांव धूलकोट में प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण कार्यक्रम के तहत जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने, फसल चक्र लागू करने और मिट्टी-पानी की समय पर जांच करवाने के लिए प्रेरित किया।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र जाजूदा ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती से रसायनों का उपयोग कम होता है जिससे किसान आत्मनिर्भर बनते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि हरियाणा सरकार प्राकृतिक खेती पर प्रति एकड़ लगभग 10 हजार रुपये का सीधा लाभ दे रही है और देशी गाय रखने पर अनुदान भी उपलब्ध करा रही है। यह राशि प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है।
कार्यक्रम में डॉ. बृजलाल ने फसल चक्र के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि इससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बनी रहती है। उन्होंने नरमा, मूंग, बाजरा और दलहन की फसलों में लगने वाले कीट-रोगों के जैविक प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी। इसके अलावा कृषि अधिकारियों ने किसानों को जल्द से जल्द फार्मर आईडी बनवाने की अपील की ताकि वे बिना किसी परेशानी के सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ उठा सकें।