हिसार। प्रदेश सरकार की बिजली संबंधी नीतियों के विरोध में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त मोर्चा ने बुधवार को राजगढ़ रोड स्थित अधीक्षक अभियंता (एसई) कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इसके बाद कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय तक पैदल रोष मार्च निकाला।
प्रदर्शनकारियों ने गुरुग्राम-नूंह में निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने, कृषि वितरण निगम अलग बनाने और स्मार्ट मीटरिंग योजना का विरोध जताया। प्रदर्शन में किसान, मजदूर, व्यापारी, नागरिक मंच, मुस्लिम कल्याण कमेटी, विकलांग अधिकार मंच तथा सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हुए। हरियाणा पावर इंजीनियर एसोसिएशन के महासचिव रविंद्र घणघस ने कहा कि गुरुग्राम-नूंह में समानांतर लाइसेंसी व्यवस्था लागू होने से उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम का वार्षिक राजस्व करीब 19 हजार करोड़ रुपये है, जिसमें अकेले गुरुग्राम का योगदान लगभग 10 हजार करोड़ रुपये है। गुरुग्राम से मिलने वाले राजस्व के जरिए व्यावसायिक उपभोक्ताओं से प्राप्त क्रॉस सब्सिडी का लाभ गरीब उपभोक्ताओं और किसानों तक पहुंचाया जाता है। निजी कंपनियों के आने से यह व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और आम उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी प्रभावित होगी।
ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन कैशियर सुरेंद्र यादव ने कहा कि निजी कंपनियों का उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि लाभ वाले क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बीएसएनएल और चंडीगढ़ बिजली व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि निजीकरण से आम उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिलेगी।
एचएसईबी सर्कल सचिव अनिल पहल ने कहा कि बिजली निगम की किसी भी संपत्ति का निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा और निजी लाइसेंसधारियों का भी विरोध जारी रहेगा। उन्होंने आंदोलन की आगामी रूपरेखा बताते हुए कहा कि 3 से 5 अगस्त तक प्रदेशभर में यूनिट स्तर पर प्रदर्शन होंगे। 6 से 8 अगस्त तक सभी सब-डिवीजनों में प्रदर्शन कर आम जनता को जागरूक किया जाएगा। 10 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर के प्रदर्शन में भाग लिया जाएगा, जबकि 11, 12 और 13 अगस्त को तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल की जाएगी। इस मौके पर विकास नेहरा, राजकुमार महला, हंसराज, ओमप्रकाश वर्मा मौजूद रहे।