हिसार। सड़क हादसे में पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद हौसले और संघर्ष से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाली भीम अवॉर्ड विजेता पैराएथलीट एकता भ्याण को अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा जा सकता है। केंद्रीय स्तर पर गठित चयन समिति ने उनके नाम की सिफारिश अर्जुन अवॉर्ड के लिए भेज दी है। इस खबर के बाद एकता के परिवार में खुशी की लहर है।
अर्जुन अवॉर्ड की सिफारिश से एकता भ्याण के हौसलों को नई उड़ान मिली है। हिसार में सेक्टर-4 निवासी एवं सेवानिवृत्त जिला बागवानी अधिकारी बलजीत भ्याण की बेटी एकता (40) ने बताया कि वर्ष 2003 में वह दिल्ली में पीएमटी की कोचिंग कर रही थीं। इसी दौरान एक सड़क हादसे में उनकी जान तो बच गई, लेकिन पैरों से दिव्यांग हो गईं। इस कठिन दौर के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई जारी रखी। वर्ष 2015 में उनकी मुलाकात कोच अमित सरोहा से हुई, जिन्होंने उनके भीतर छिपी खेल प्रतिभा को पहचान कर नई दिशा दी। चक्का फेंक (क्लब थ्रो) से शुरुआत की ओर फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। संवाद
9 साल में 40 पदक जीत चुकी एकता
एकता ने बताया कि वर्ष 2016 से 2025 तक राष्ट्रीय स्तर पर 30 पदक सहित कुल 40 पदक अपने नाम किए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें दो पदक मिले हैं, जबकि वर्ल्ड चैंपियनशिप में तीन और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में चार पदक हासिल कर चुकी हैं। वर्ष 2012 में राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने उन्हें दिव्यांग रोल मॉडल के रूप में भी चुना है।
जापान एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक लक्ष्य
एकता ने बताया कि मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है कि उनका नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए भेजा गया है। मेरा लक्ष्य वर्ष 2026 में जापान में होने वाले एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना है। इसके साथ ही वर्ष 2028 में अमेरिका में होने वाले पैरा ओलंपिक में भी पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाना चाहती हूं। फिलहाल कोच अमित सरोहा के नेतृत्व में नियमित प्रशिक्षण ले रही हूं। एकता ने बताया कि उसने एमए और बीएड करने के बाद वर्ष 2013 में हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्तमान में रोजगार विभाग में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत है।