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Hisar News: आधुनिकता के भेष में युवाओं को जकड़ रही ई-सिगरेट की लत

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डॉ. प्रशांत कुमार
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हिसार। ई-सिगरेट और वेपिंग डिवाइस आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बनकर युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं लेकिन इनके पीछे छिपे स्वास्थ्य संबंधी खतरे गंभीर हैं। विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जिला नागरिक अस्पताल (डीसीएच) के विशेषज्ञों ने युवाओं को तंबाकू और निकोटीन उत्पादों से दूर रहने का संदेश दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि रंग-बिरंगी पैकेजिंग, विभिन्न फ्लेवर और आकर्षक प्रचार के जरिए तंबाकू उद्योग युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
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डीसीएच के कंसल्टेंट मनोचिकित्सक डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि अस्पताल की मनोरोग ओपीडी में प्रतिदिन 10 से 15 ऐसे मरीज पहुंचते हैं जिनमें तंबाकू, धूम्रपान, गुटखा, खैनी और निकोटीन की लत से जुड़ी मानसिक या व्यवहारिक समस्याएं पाई जाती हैं। इनमें चिंता, चिड़चिड़ापन, तनाव, अवसाद, नींद की कमी और ध्यान केंद्रित न कर पाने जैसी समस्याएं प्रमुख हैं।
उन्होंने बताया कि तनाव से राहत पाने के लिए लोग अक्सर सिगरेट या तंबाकू का सहारा लेते हैं लेकिन यह केवल अस्थायी राहत देता है। निकोटीन एक अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला पदार्थ है जो धीरे-धीरे व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से अपने ऊपर निर्भर बना देता है। किशोरावस्था और युवावस्था में इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है क्योंकि इस दौरान मस्तिष्क का विकास जारी रहता है।
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डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि ई-सिगरेट को सामान्य सिगरेट की तुलना में कम नुकसानदायक मानना गलत है। इनमें मौजूद निकोटीन मस्तिष्क पर वही प्रभाव डालती है जो अन्य तंबाकू उत्पाद डालते हैं। तंबाकू का दुष्प्रभाव केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक, कैंसर और श्वसन संबंधी बीमारियों का कारण भी बन सकता है। परोक्ष धूम्रपान से बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।
तंबाकू छोड़ना कठिन, लेकिन असंभव नहीं
डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि दृढ़ इच्छाशक्ति, परिवार के सहयोग, नियमित व्यायाम, योग, ध्यान और विशेषज्ञों की सलाह से निकोटीन की लत पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी व्यक्ति तंबाकू छोड़ता है, उतना ही अधिक लाभ उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को मिलता है। युवाओं को ई-सिगरेट और अन्य निकोटीन उत्पादों के आकर्षण से बचाना समय की जरूरत है। स्वस्थ जीवन के लिए तंबाकू से दूरी ही सबसे प्रभावी उपाय है।
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