कुलदीप जांगड़ा
हिसार। नागरिक अस्पताल में बने ब्लड बैंक में ए व बी पॉजिटिव, निगेटिव सहित ओ, एबी ग्रुप का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है। इससे ब्लड की जरूरत वाले मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। ब्लड ग्रुप ए व बी, ओ निगेटिव का खत्म हो गया है जबकि पॉजिटिव ग्रुप की इक्का-दुक्का यूनिट बची है। इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है कि सरकार से निजी ब्लड बैंकों को रक्तदान शिविर लगाने की अनुमति मिला है। इससे सरकारी ब्लड बैंकों में रक्त की कमी आ गई है। नागरिक अस्पताल में रोजाना औसतन 20 यूनिट रक्त की लागत है।
दस दिन बाद रेडक्रॉस की तरफ से बरवाला व नारनौंद में 140 यूनिट के दो ब्लड कैंप आयोजित है। मगर ब्लड की इन कैंप से पहले जरूरत है। सरकारी ब्लड बैंक की कोशिश होगी कि पहले कहीं कैंप लगाया जाए। ब्लड बैंक अधिकारी का कहना है कि मरीज को रेफर करना समस्या का हल नहीं है। अगर अग्रोहा से ब्लड लाने पर सेल टूट जाते है तो पहले भी वहां से ब्लड आता था। ऐसा कुछ नहीं है। इसका मरीज चिकित्सकों से लिखित में लें। संवाद
रिफ्रेशमेंट के मिलते हैं अधिक रुपये
सरकार की ओर से आयोजित ब्लड कैंप में डोनर को रिफ्रेशमेंट के निर्धारित 50 रुपये दिए जाते हैं। जबकि निजी ब्लड बैंक वाले अधिक यूनिट एकत्रित करने के चक्कर में डोनर को रिफ्रेशमेंट के अधिक रुपये और अन्य लालच देते हैं।
चिकित्सक बाहर से रक्त लाने से करते हैं इनकार
चिकित्सक रक्त की कमी से मरीजों को रेफर कर पल्ला झाड़ लेते हैं। बाहर का रक्त लाने से मना कर देते हैं। मरीज अग्रोहा से रक्त लाने की बात करते है तो चिकित्सक वहां से लाने पर सेल टूट जाने की बात कहते हुए चढ़ाने से मना कर देते हैं। 14 अगस्त को डाबड़ा गांव से जिला अस्पताल में आई एक गर्भवती को ब्लड बैंक में ब्लड न होने से गायनी की चिकित्सकों ने रेफर कर दिया था और परिजनों को उसे गंभीर हालत के चलते निजी अस्पताल में जाना पड़ा।
कांग्रेस भवन में ब्लड कैंप, न रेडक्रॉस व सरकारी ब्लड बैंक को सूचना
उधर, कांग्रेस भवन में शुक्रवार को रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। मगर इसकी सूचना न सरकारी ब्लड बैंक को है न रेडक्रॉस सोसायटी। हालांकि, कोई भी ब्लड कैंप लगाने से एक सप्ताह पहले इनको सूचना देनी पड़ती है। बताया जा रहा है कि यह निजी संस्थान द्वारा ब्लड कैंप लगाया जा रहा है। नियमानुसार जब सरकारी ब्लड बैंक में ब्लड की कमी हो तो कोई निजी संस्थान कैंप नहीं लगा जा सकता। चिकित्सकों के मुताबिक थैलीसीमिया वाले मरीजों को रूटीन में रक्त की अधिक जरूरत होती है। कम वजन या खून की कमी वाले बच्चे एवं गर्भवती, खूनी उल्टी या दस्त लगने, गंभीर चोटिल मरीज को रक्त चढ़ाना पड़ता है।
हमारे पास रक्त का स्टॉक है। कुछ यूनिट की कमी है। अगर कोई मरीज आता है उसे इमरजेंसी में रैपिड करवाकर रक्त दे देंगे। हमारे पास कोई सूचना नहीं है कि कांग्रेस भवन में रक्तदान शिविर लग रहा है। इसकी एक सप्ताह पहले सूचना देना जरूरी है। अचानक सूचना देने का कोई फायदा नहीं, क्योंकि हमें भी तैयारी करनी पड़ती है। - डॉ. इंदू यादव, प्रभारी, ब्लड बैंक, नागरिक अस्पताल, हिसार