हिसार। लुवास में कॉपीराइट पंजीकरण मिलने पर डॉ. अनिका मलिक धुंधवाल को सम्मानित करते कुलपति प्रो.
हिसार। सतत डेयरी विकास को मजबूत करने की दिशा में लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) ने एक और शैक्षणिक उपलब्धि अपने नाम की है। विश्वविद्यालय के कॉपीराइट कार्यालय की ओर से वैज्ञानिक शोध कार्य हरियाणा की डेयरी उत्पादन प्रणालियों के लिए स्थिरता मूल्यांकन संकेतकों के विकास के लिए कॉपीराइट पंजीकरण प्रदान किया गया है। यह डेयरी क्षेत्र में स्थायी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है।
यह शोध कार्य लुवास की सहायक प्रोफेसर डॉ. अनिका मलिक धुंधवाल ने अपने पीएचडी शोध के अंतर्गत सम्पन्न किया है। यह शोध पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विस्तार शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गौतम के मार्गदर्शन में पूर्ण हुआ। इसमें हरियाणा की डेयरी उत्पादन प्रणालियों का पर्यावरणीय, आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण से वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया है। इनके लिए उपयोगी एवं व्यावहारिक स्थिरता संकेतकों का विकास किया गया है।
शोध के अंतर्गत विकसित किए गए ये स्थिरता मूल्यांकन संकेतक शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, विस्तार विशेषज्ञों, योजनाकारों तथा विकास एजेंसियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। ये संकेतक साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण में सहायक होने के साथ-साथ किसानों को सतत डेयरी पालन पद्धतियों को अपनाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा उत्पादन प्रणाली को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. विनोद कुमार वर्मा ने शोध टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शोध कार्य राज्य एवं देश में डेयरी क्षेत्र की नीतियों को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनोज रोज ने कहा कि स्थिरता मूल्यांकन वैज्ञानिक उपकरण डेयरी क्षेत्र में वैज्ञानिक निर्णय-निर्माण एवं प्रभावी नीति निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. सोनिया सिंधु ने कहा कि अनुसंधान की गुणवत्ता, उपयोगिता एवं सामाजिक प्रासंगिकता को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। इस मौके पर डॉ. नरेश जिंदल, सहायक जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सुजॉय सहित अन्य उपस्थित रहे।