हिसार। निजी संस्थान तो दूर सरकारी संस्थानों में भी श्रम कानूनों का उल्लंघन जमकर हो रहा है। ऐसा ही मामला राजकीय पशुधन फार्म में सामने आया है। यहां के मुख्य अधीक्षक द्वारा श्रम कानूनों का न केवल उल्लंघन किया गया, बल्कि श्रम विभाग के अधिकारी द्वारा मांगे गए दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए। इसके बाद श्रम विभाग के सह आयुक्त द्वारा इस मामले में मुख्य अधीक्षक के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में चालान पेश किया गया है।
यह है मामला
मामले के अनुसार फार्म के ठेकेदारों का नियमानुसार श्रम विभाग में पंजीकरण नहीं कराया गया। फार्म में छह ठेकेदारों द्वारा विभिन्न कार्यों के ठेके लिए गए, लेकिन उनके द्वारा श्रमिकों को ईपीएफ, ईएसआई और वेलफेयर फंड आदि कुछ भी प्रक्रिया अमल में नहीं लाई गई। इस संबंध में विभाग से सेवानिवृत्त डॉ. सुरेंद्र सिंह गहलावत द्वारा मार्च 2019 में सीएम विंडो पर शिकायत लगाई गई। इसके बाद श्रम विभाग के अधिकारियों द्वारा 28 अगस्त 2020 में राजकीय पशुधन फार्म कार्यालय के रिकॉर्ड का निरीक्षण किया गया, जिसमें भारी कमियां पाई गईं। इसके बाद सहायक श्रम आयुक्त द्वारा उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई, जिसके आधार पर उच्चाधिकारियों ने अदालत में चालान पेश करने के निर्देश दिए। इस पर सहायक श्रम आयुक्त द्वारा राजकीय पशुधन फार्म के मुख्य अधीक्षक के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में चालान पेश किया गया है, जिसमें अदालत ने सुनवाई के लिए 12 फरवरी की तिथि निर्धारित की है।
कोर्ट में पेश चालान में यह सब
सवाल - जवाब
सवाल 1. क्या प्रमुख नियोक्ता ने पंजीकरण प्रमाण पत्र प्राप्त किया है।
जवाब : पंजीकरण के लिए आरसी प्राप्त/आवेदन नहीं किया गया।
सवाल 2. क्या श्रमिकों की शक्ति बढ़ाने के कारण पंजीकरण प्रमाणपत्र में किसी संशोधन की आवश्यकता है।
जवाब : हां, ठेकेदारों की कुल संख्या 6 हैं, लेकिन 5 के लिए आवेदन किया है।
सवाल 3. क्या ईएसआई अनुबंध श्रम अधिनियम के तहत पीई के लाभ को उपलब्ध कराया है।
जवाब : निरीक्षण के समय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया।
सवाल 4. क्या अनुबंध कार्य शुरू करने की सूचना निर्धारित समय-सीमा के साथ फॉर्म-6 में क्षेत्र के निरीक्षक को भेजी।
जवाब : रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया।
सवाल 5. प्रधान नियोक्ता ने फार्म-8 में ठेकेदार के रजिस्टर और अनुबंध के काम की प्रगति को बनाए रखा है।
जवाब : रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया।
सवाल 6. क्या फार्म -21 में वार्षिक रिटर्न पंजीकरण अधिकारी को निर्धारित सीमा के भीतर भेजा गया है।
जवाब : रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया।
सवाल 7. क्या नियम 80 के तहत नोटिस सभी परिसर में प्रदर्शित किए गए हैं।
जवाब : रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया।
सवाल 8. पीई नियम 25 में लाइसेंस के साथ संलग्न करने के लिए अनुलग्नक में निर्दिष्ट शर्त के साथ नियोजित करना।
जवाब : रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया।
सवाल 9. क्या अधिकृत प्रतिनिधि पीई श्रमिक के भुगतान की गई राशि का उल्लेख करते हुए मजदूरी के रजिस्टर में प्रविष्टियों के अंत में उसके हस्ताक्षर के तहत एक प्रमाण पत्र दर्ज कर रहा है।
जवाब : रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया।
ये हो सकती है सजा
वरिष्ठ अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि श्रम विभाग ने श्रम अधिनियम 1970 की धारा 22 और 24 के अंतर्गत सीजेएम कोर्ट में चालान पेश किया है। इन दोनों धाराओं के अंतर्गत संबंधित अधिकारी को रिकॉर्ड न देने, नियम के मुताबिक काम न करने, उपस्थित होने को कहने के बावजूद उपस्थित न होने आदि का दोषी पाया जाता है। अब अदालत इस मामले में तथ्यों की जांच-परख करेगी और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। यदि इसमें आरोपी को दोषी पाया जाता है तो कानून के अनुसार धारा 22 के अंतर्गत तीन माह की सजा और 500 रुपये तक जुर्माना और धारा 24 के अंतर्गत तीन माह की सजा और 1000 रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
वर्जन
सरकारी अधिकारियों द्वारा मजदूरों का लंबे समय से शोषण किया जा रहा है। ऐसा सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सरकारी संस्थाएं श्रम कानूनों का उल्लंघन न कर सकें। दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई अधिकारी इस तरह मजदूरों हक पर डाका न डाल सके।
- डॉ. सुरेंद्र गहलावत, शिकायतकर्ता
वर्जन
चालान कोर्ट में पेश किया होगा, कोई बात नहीं, मैं स्टडी करूंगा।
- डॉ. कृष्ण बागोरिया, मुख्य अधीक्षक, राजकीय पशुधन फार्म, हिसार।
वर्जन
शिकायतकर्ता की मौजूदगी में संस्थान का निरीक्षण किया गया था। श्रम कानूनों के तहत जो भी कमियां पाई गईं, उनकी रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय भेजी गई। मुख्यालय से चालान दायर करने के निर्देश मिलने के बाद अदालत में चालान दायर कर दिया गया है। इसमें 12 फरवरी को सुनवाई होनी है।
- मनीष कुमार, सहायक श्रम आयुक्त, हिसार