हिसार। शादियों का सीजन आते ही शादी के कार्ड के कारोबार में तेजी आई है। हालांकि समय के साथ-साथ इसमें भी बदलाव हुआ है। शादी के कार्ड का कारोबार करने वाले लोगों को डिजिटलाइजेशन का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। इस कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि शहर में डिजिटल कार्ड का चलन बढ़ा है जबकि ग्रामीण क्षेत्र में लोग अभी भी कार्ड ही छपवा रहे हैं।
शहर में ज्यादातर लोग लोग गिने चुने कार्ड ही छपवाते हैं। इसका कारण यह है कि आजकल लोगों के पास समय की कमी है और डिजिटल कार्ड को सोशल मीडिया के माध्यम से आसानी से परिचित के पास भेजा जा सकता है। इसके अलावा डिजिटल कार्ड सस्ता भी पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग अभी भी पारंपरिक कार्ड को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। यहां से पहले की तरह ही कार्ड तैयार करवाने के ऑर्डर मिल रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार अब उनका 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो गया है।
शहर में 150 से ज्यादा कारोबारी
वर्तमान में शहर में शादी का कार्ड तैयार करने के पेशे से 150 से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इनमें से करीब 80 लोगों के पास प्रिटिंग मशीन उपलब्ध हैं। कारोबारियों के अनुसार एक कार्ड की कम से कम कीमत 5 से 7 रुपये है। जिनका शादी का बजट कम होता है वो इसी रेंज के कार्ड छपवाते हैं। एक मध्यम वर्गीय परिवार 20 से 40 रुपये के बीच की रेंज का कार्ड छपवाता है।
यह कहना है कारोबारियों का
- अब शादी के कार्ड का काम पहले से काफी कम हो गया है। संभावना है कि अगले 2-3 साल में लोग कार्ड छपवाना ही बंद कर दें, उसकी जगह डिजिटल कार्ड ले ले।
राजेश, संचालक, संचालक, आरवी ग्राफिक्स
- शहर के लोग अब नाममात्र के ही कार्ड छपवा रहे हैं। ग्रामीण उपभोक्ताओं के सहारे ही कारोबार चल रहा है। काफी लोग तो यह काम छोड़ भी चुके हैं।
अशोक, संचालक, संचालक, आनंद पेपर मार्ट
- कार्ड छपवाने की अपेक्षा लोग डिजिटल कार्ड को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे उनका कारोबार कम हो गया है। कुछ साल पहले तक डिजिटल कार्ड का चलन नहीं था और लोग काफी संख्या में कार्ड छपवाते थे।
संजय अग्रवाल, संचालक, अग्रवाल कार्ड एंड पेपर