डीजीपी केपी सिंह ने जीजेयू में आयोजित पंच-सरपंच सम्मेलन में नशे को लेकर प्रदेश में फैल रहे जाल को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत सर्वे के अनुसार बताया है कि प्रदेश में 22 प्रतिशत स्कूली और 50 प्रतिशत हॉस्टलों में रहने वाले बच्चे नशे की गिरफ्त में हैं। ये बच्चे नशा करते हैं।
वहीं भ्रूण हत्या के मामले में प्रदेश बेहद बदनाम हो चुका है। इन बुराइयों के प्रति निर्णायक जंग का समय आ गया है। उन्होंने जिले के पंच-सरपंचों को नशे और भ्रूण हत्या के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि नशा समाज के प्रति एक बड़ी बीमारी बन गया है, जो सभी पीढ़ियों का नाश कर देता है। अगर यही कहानी चलती रही तो एक दिन नशा घर-घर की कहानी बन जाएगा।
सोशल मीडिया पर उन्होंने कहा कि फरवरी में इसके कारण माहौल बिगड़ गया था। इसलिए इसका सदुपयोग होना चाहिए। उन्होंने द्रोपदी, सीता, सात कन्याओं के कारण कंस और रावण जैसी बुराई के अंत का उदाहरण देते हुए कन्याओं के होने की जरूरत बताई।
बढ़ते नशे के जिम्मेदार मां-बाप
डीजीपी ने कहा कि बढ़ते नशे के सबसे अधिक जिम्मेदार बच्चों के मां-बाप हैं। उसके बाद पड़ोसी, उसके बाद टीचर्स और फिर उसके बाद पुलिस है। नशे के खात्मे के लिए हम सबको मिलकर लड़ना होगा। एक मुहिम चलानी पड़ेगी।
वर्दी के नशे से खतरनाक हैं पदार्थ का नशा
डीजीपी ने कहा कि किसी भी पदार्थ का नशा पद और पथ के नशे से ज्यादा खतरनाक है। पद का नशा पद जाने के बाद और वर्दी का नशा वर्दी उतरने के बाद दूर हो जाता है, लेकिन पदार्थ का नशा शरीर के साथ आत्मा को भी खत्म कर देता है, जिससे सभी पीढ़ियों को नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने अपने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि हममें से भी कुछ गलत किस्म के लोग हैं। लेकिन हमें इस बुराई के साथ लड़ना है।
भ्रूण हत्या पर डीजीपी के तेवर गर्म
डॉ. अनंतराम पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए डीजीपी ने कहा कि आपके इलाके का एक नामी डॉक्टर भ्रूण हत्या के मामले में पकड़ा गया। उस पर मुकदमा दर्ज हुआ तो वह विदेश भाग गया।
हमने नाकेबंदी कर दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ लिया। ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रदेश में भ्रूण हत्या को लेकर भी डीजीपी ने लोगों को मार्मिक कहानी भी सुनाई। उन्होंने एक भ्रूण हत्या विशेषज्ञ अमेरिकी डाक्टर का हवाला देते हुए कहा कि डॉक्टर ने इस बारे में बताया कि वे सबसे पहले भ्रूण के सिर पर हथौड़ी से वार करते हैं।
इसके बाद वे अंगुलियां, हाथ-पैर आदि की हड्डियों के टुकड़े कर भ्रूण को बाहर निकाल देते हैं। बाद में जब स्क्रीन पर सब नजारा देखा तो वे स्वयं को माफ नहीं कर पाए और जीवन में कभी ऐसा नहीं करने की ठानी। उस डाक्टर ने भ्रूण हत्या को गूंगी चीख का नाम दिया।
पर्यावरण बचाओ......
डीजीपी ने कहा कि भगवान शिव के महापर्व सावन माह में लोग कांवड़ लेने जाते हैं। वे इसे शिव की भक्ति कहते हैं, लेकिन शिव का मतलब होता है सत्यम शिवम् सुंदरम्। मतलब इस माह में पौधे लगाइए। सत्यम् शिवम् सुंदरम् अपने आप हो जाएगा। पूरी पंचायत को जहां खाली जगह दिखे, वहां पौधे लगाने चाहिए।
डीजीपी ने दिया गीता का ज्ञान
डीजीपी केपी सिंघल ने पंच-सरपंचों को गांवों में शांति और सद्भाव कायम रखने, निष्पक्ष फैसले सुनाने आदि के लिए कई किस्से सुनाए। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की कहानी पंच परमेश्वर, यक्ष और युधिष्ठिर के संवाद, विष्णु और नारद की बात, कृष्ण का अर्जुन को गीता का उपदेश के उदाहरण देकर पंच-सरपंचों को उनकी जिम्मेदारी समझाई।
समाधान न हो तो सीधे मुझे मैसेज करो, मैं खुद पूछ लूंगा
डीजीपी केपी सिंह ने पंच-सरपंचों को कहा कि गांव में आपको कोई भी बुराई दिखे। आप डीएसपी के नंबर पर मैसेज करो। अगर 3-4 दिन में समाधान न हो तो मेरा नंबर लिखो, मैसेज कर देना, संबंधित डीएसपी से स्वयं पूछूंगा कि कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।