भिवानी में बिना वर्दी के बस चलाता चालक।
भिवानी। बार-बार उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बाद भी हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी वर्दी में नजर नहीं आ रहे। इस वर्दी के लिए उनको सरकार की तरफ से बाकायदा वर्दी भत्ता जारी किया जाता है। उसके बाद वे सिविल ड्रेस में चलना पसंद करते हैं। हालांकि उच्च अधिकारी लापरवाह कर्मियों को जुर्माना करने की बात करते हैं पर उसके बाद स्थिति जस की तस रहती है।
बता दें कि प्रदेश सरकार की तरफ से निर्देश हैं कि रोडवेज कर्मचारियों को वर्दी में होना अनिवार्य है, खासकर चालक और परिचालक को। उसके बाद भी आदेशों को दरकिनार कर ज्यादातर चालक-परिचालक वर्दी में नजर नहीं आते। उक्त कर्मचारी सिविल ड्रेस में ज्यादा रहते हैं। ये नियम किलोमीटर स्कीम के तहत चलने वाली बसों पर भी लागू हैं, लेकिन उसके बाद भी वर्दी नहीं पहनने को लेकर कर्मचारी गंभीर नहीं हैं।
संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि लंबे रूट से लेकर लोकल और किलोमीटर योजना के तहत चलने वाली बसों के कर्मचारी भी आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। वर्दी न पहनने के पीछे अजीब तरह के तर्क देते नजर आए। जिसमें वर्दी मैली होने से लेकर सिर्फ आज नहीं पहनी तक का तर्क दिया। हालांकि रोडवेज विभाग कर्मचारी को वर्दी भत्ता से लेकर उसकी सिलाई तक का भुगतान करता है।
रविवार दोपहर को भिवानी डिपो से चरखी दादरी जाने वाली रोडवेज व चंडीगढ़ जाने वाली किलोमीटर स्कीम की बस में देखने को मिला। जिसमें ड्राइवर रंगीन टी-शर्ट व सफारी सूट में नजर आए। बात करने पर ड्राइवरों ने कहा कि ड्यूटी के दौरान वर्दी पहनना अनिवार्य है, लेकिन हम आज ही नहीं पहन के आए या वर्दी मैली थी, इसीलिए नहीं पहनी। परिवहन मंत्री बनते ही असीम गोयल ने अंबाला से चंडीगढ़ का सफर रोडवेज बस में तय करते समय चालकों व परिचालकों को उनके लिए बनाए नियमों का पालन करने के निर्देश दिए थे।
पिछले हफ्ते ही वर्दी पहने और नियमों का पालन करनी संबंधी निर्देश कर्मचारियों को दिए थे। ड्यूटी के दौरान वर्दी पहनना अनिवार्य है। बिना वर्दी के ड्यूटी पर मिलने पर एक हजार रुपये जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। अगर कोई चालक-परिचालक ड्यूटी के दौरान बिना वर्दी के मिलता है तो उसके खिलाफ जुर्माना किया जाएगा।
- विक्रम सिंह कंबोज, डिपो महाप्रबंधक, भिवानी।