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उपायुक्त आवास घेरकर दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

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कालवास में डंडों से पीट-पीटकर दलित युवक की हत्या करने के विरोध में दलित संगठनों ने शनिवार को क्रांतिमान पार्क में एकत्रित होकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद जुलूस के रूप में डीसी आवास पहुंचकर आवास का घेराव किया। उपायुक्त को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया।
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रविवार को कबीर छात्रावास मेें दलित संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक होगी। क्रांतिमान पार्क में शनिवार को एकत्रित हुए ह्यूमन राइट लॉ नेटवर्क, बहुजन समाज पार्टी, संत कबीर शिक्षा समिति, डॉ. अंबेडकर सभा, गुरु रविदास महासभा, डीएएसएफआई, ओड महासभा, भगवान वाल्मीकि जागृति मंच सहित दर्जनों संस्थाओं के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने घटना पर रोष जताया।

अधिवक्ता रजत कल्सन ने कहा कि इस मामले में भी पुलिस हर बार की तरह आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है। ह्यूमन राइट लॉ नेटवर्क पीड़ितों को उच्चतम स्तर तक कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगा। बसपा नेता बलराज सातरोड़िया ने कहा बसपा ही उन्हें दबंगों के उत्पीड़न से बचा सकती है। कबीर शिक्षा समिति धानक समाज के प्रधान रतन बड़गुज्जर ने इस घटना के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।
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पीड़ित परिवार को मिले 25 लाख रुपये की सहायता
क्रांतिमान पार्क में रोष-प्रदर्शन के बाद दलित संगठनों ने उपायुक्त आवास का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की। उपायुक्त एमएल कौशिक को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये आर्थिक सहायता, मृतक के परिवार को सरकारी नौकरी, आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने, इस मामले की जांच आईपीएस अधिकारी से करवाने, जांच 30 दिनों में पूरा करने, मृतक के  बच्चों को प्रशासन की तरफ से शिक्षा का प्रबंध करने, घायल रामअवतार का प्रतिष्ठित अस्पताल में इलाज कराने व उसे पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, जीव रक्षा समितियों पर पाबंदी लगाने, सरपंच की बर्खास्तगी और मौके पर मौजूद अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की। हिसार को दलित उत्पीड़न प्रभावित जिला घोषित किया जाए।

दलित संगठनों ने अल्टीमेटम दिया कि आगामी 24 घंटे में उक्त मांगों पर विचार नहीं किया गया तो संगठन कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इस मौके पर अधिवक्ता रजत कल्सन, बलराज सातरोड, रतन बड़गुज्जर, जोगीराम खुंडिया, बजरंग इंदल, पृथ्वी सिंह कत्याल, संजय चौहान, सतीश कुमार, जानकी देवी, रज्जो देवी, राजेश कुमार, अजीत सिंह, राजबीर सिंह, प्रदीप अंबेडकर, भीम सिंह इंदौरा, तुलाराम, अनिल बागड़ी, शिवकुमार नागर, सुमन बावलिया, शीला देवी, प्रदीप उमरा सहित भारी संख्या में दलित समाज के अन्य लोग उपस्थित थे।
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