हिसार। बरसात के मौसम में डेंगू-मलेरिया के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य विभाग ने भी निगरानी बढ़ा दी है। निजी लैब में डेंगू की जांच के लिए 600 रुपये की लक्ष्मण रेखा खींच दी गई है। मरीजों से इससे अधिक राशि न वसूली जाए इसके लिए नजर रखी जा रही है। शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। सरकारी आदेश तो कड़े हैं लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी नागरिक अस्पताल खुद किट की किल्लत से जूझ रहा है और स्टॉक में सिर्फ 20 जांच किट हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, निजी अस्पतालों में डेंगू जांच के लिए 600 रुपये से अधिक लेना उचित नहीं है। विभाग की टीमें निजी अस्पतालों में होने वाली जांच और मरीजों से लिए जा रहे शुल्क पर नजर रख रही हैं। इस साल अब तक डेंगू के 12 केस मिल चुके हैं। सरकारी अस्पताल में भर्ती डेंगू और मलेरिया संभावित मरीजों की जांच निशुल्क की जा रही है। विभाग को शिकायतें मिली हैं कि कुछ निजी अस्पताल डेंगू जांच के नाम पर निर्धारित दर से अधिक राशि वसूलते हैं। ऐसे अस्पतालों पर निगरानी रखी जा रही है।
एक किट से एक मरीज की जांच
बाजार और अस्पतालों में उपलब्ध रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) किट सामान्यतः एकल उपयोग के लिए होती है। एक किट से केवल एक मरीज की जांच की जाती है। इसमें मरीज के खून की कुछ बूंदें डालकर करीब 15 से 20 मिनट में डेंगू के एनएस-1, आईजीएम या आईजीजी की जांच की जाती है।
ईएलआईएसए किट से कई जांच की सुविधा उपलब्ध :
पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं और अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली ईएलआईएसए किट के एक डिब्बे से किट के आकार और कंपनी के अनुसार 10 से 96 मरीजों तक की जांच की जा सकती है। छोटे डिब्बे में 10 से 25, जबकि बड़े डिब्बे में 40 से 50 जांच की क्षमता होती है। सबसे बड़ी ईएलआईएसए किट से करीब 96 जांच की जा सकती हैं।
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डेंगू की जांच के नाम पर मरीजों से निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वसूलने की शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। मरीज या उनके परिजन अधिक शुल्क लिए जाने पर स्वास्थ्य विभाग को शिकायत कर सकते हैं। निजी अस्पतालों में डेंगू जांच के लिए 600 रुपये जांच शुल्क निर्धारित है। इससे अधिक नहीं ले सकते हैं।
डॉ. सुशील गर्ग, रक्त बैंक प्रभारी, जिला नागरिक अस्पताल हिसार।