हिसार।
करीब साढ़े तीन साल पहले हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में जींद के तत्कालीन डीएसपी कप्तान सिंह के गनमैन द्वारा कथित रूप से गोली मारकर अपनी पत्नी की हत्या करने के मामले की सोमवार को अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत की अदालत में शिकायतकर्ता ने याचिका दायर कर सबूतों को नष्ट करने के आरोप में एक सेवानिवृत्त पुलिस अधीक्षक, दो डीएसपी सहित नौ पुलिस कर्मचारियों और एक शराब ठेकेदार को आरोपी बनाने की मांग की है। इस पर अदालत ने जांच एजेंसी को नोटिस जारी कर 5 जनवरी, 2024 तक जवाब तलब किया है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडवोकेट मनमोहन राय व हरदीप कुमार ने बताया कि शिकायतकर्ता विकास ने सेवानिवृत्त एसपी जगवंत सिंह लांबा, सीन आफ क्राइम इंचार्ज डॉ. अजय, डीएसपी अशोक कुमार, जींद तत्कालीन डीएसपी कप्तान सिंह, शहर थाना के तत्कालीन प्रभारी विनोद कुमार, एएसआई रविंद्र, एएसआई सतपाल, एएसआई समुेर सिंह, सिपाही कुलदीप सिंह, शराब ठेकेदार वजीर शर्मा को आरोपी बनाने की मांग की है।याचिका में उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता व उसके परिजनों को पोस्टमार्टम से पहले मृतका रिंकू का शव नहीं देखने दिया गया और डीएसपी कप्तान सिंह व सेवानिवृत्त एसपी जसवंत सिंह लांबा की मौजूदगी में शिकायतकर्ता को धमकाकर कई कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। इसके बाद अदालत के आदेश पर हुई दोबारा जांच के बाद प्रस्तुत किए गए सप्लीमेंटरी चालान से स्पष्ट हो चुका है कि डीएसपी कप्तान सिंह ने वारदात में प्रयोग किया गया पिस्तौल व खाली खोल गायब करवाया था।
पुलिस ने पिस्तौल को बना दिया था सोटा
एफआईआर के अनुसार जींद के तत्कालीन डीएसपी कप्तान सिंह के गनमैन कांस्टेबल विक्रम ने 16 अप्रैल, 2020 को हिसार में अपनी पत्नी रिंकू की हत्या कर दी थी। जांच के बाद जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आरोपी ने अपनी पत्नी की हत्या मोगरा/सोटा (हैवी वुडन लॉग) से की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला के सिर पर दो प्रवेश घावों का और दो निकास घावों का जिक्र है। 19 मई, 2020 को प्राप्त हुई एफएसएल रिपोर्ट में इन घावों को गोली लगने के घाव बताए। इसके अलावा मेडिकल बॉर्ड ने 12 सितंबर, 2020 व 21 नवंबर, 2020 को दो बार अपनी राय दी और मौत का कारण गोली लगना बताया। बावजूद इसके पुलिस सोटे पर ही अड़ी रही।