कांग्रेस से निष्कासित पूर्व विधायक रामनिवास घोड़ेला का पूर्व सांसद एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य दीपेंद्र हुड्डा से मिलना कांग्रेसियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। घोड़ेला की दीपेंद्र के साथ फोटो को एक कांग्रेसी कार्यकर्ता ने अपनी फेसबुक पर डाल दिया। उसके बाद इस फेसबुक पोस्ट का स्क्रीन शॉट लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के जिला कांग्रेस कमेटी हिसार नामक ग्रुप पर डालकर उस पर कांग्रेसियों के बीच वाकयुद्ध छिड़ा हुआ है।
हुआ हूं कि दीपेंद्र हुड्डा ने 17 फरवरी को बरवाला स्कूल में एक कार्यक्रम में आए थे। इस दौरान पूर्व विधायक और कांग्रेस से निष्कासित रामनिवास घोड़ेला उनसे मिले थे। दीपेंद्र को बुके भेंट करते रामनिवास घोड़ेला की फेसबुक पर लगी फोटो को कांग्रेस के व्हाट्सएप ग्रुप पर डालकर लिखा गया - ...कुछ समझ में नहीं आ रहा है। क्या हमारे कांग्रेस प्रत्याशी और कार्यकर्ताओं के साथ विश्वासघात है या विश्वास। फिर आगे लिखा है- बरवाला में कांग्रेस का विनाश करने वाले घोड़ेला जी के बारे में आपकी क्या राय है। एक कार्यकर्ता लिखते हैं- भाई तभी दुख हुआ है कि भूपेंद्र गंगवा भाई की मेहनत पर पानी फेरने वाले को दीपेंद्र हुड्डा कांग्रेस नेता गले लगा रहे हैं। एक कार्यकर्ता ने तो यहां तक लिख दिया कि - कांग्रेस बरवाला से हारने में सबसे अहम भूमिका हुड्डा साहब ने निभाई है। इस प्रतिक्रिया पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लिखते हैं - भाई हुड्डा साहब के लिए सोच समझकर बोलो यह आपके लिए भी अच्छा है और हम सब के लिए भी अच्छा है।
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पार्टी शीर्ष नेतृत्व की सब पर नजर होती है। मैं तो कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रहा हूं। इस बारे में क्या बताएं पार्टी नेतृत्व ही सारे निर्णय लेता है।
भूपेंद्र गंगवा, विधानसभा चुनाव में बरवाला से कांग्रेस प्रत्याशी रहे।
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सीनियर लीडर के लिए गलत क्यों बोलते हैं। हुड्डा साहब का क्या मतलब है। किसी से मिलना कोई गलत है क्या? कार्यक्रम में दूसरी पार्टी के नेता से भी मिलते हैं। क्या राहुल गांधी नरेंद्र मोदी से नहीं मिलते। बाइचांस की बात है आमना-सामना हो गया तो बुके दे दिए। इसमें कोई गलत नहीं है।
अनिल मान, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता।