फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hisar News: बालसमंद से सटे राजस्थान के गांवों में गोवंश में जानलेवा लंपी वायरस की दस्तक

विज्ञापन
विज्ञापन
हिसार। करीब तीन साल पहले गोवंश पर कहर बनकर टूटी संक्रामक बीमारी लंपी ने फिर से दस्तक दे दी है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बाड़मेर जिले के कुछ इलाकों में गोवंश में संक्रमण के बाद जिले के बालसमंद से सटी राजस्थान की भादरा तहसील के कई गांवों में गोवंश लंपी वायरस की चपेट में है। हिसार से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर संक्रमण के केस मिलने से इस वायरस के हरियाणा में भी फैलने की आशंका है।
विज्ञापन

भादरा के गांव, बीरान, मुंसरी, सूरतपुरा, छानीबड़ी समेत कई गांवों में लंपी वायरसर के संक्रमण के केस मिले हैं। लंपी वायरस का पुख्ता इलाज नहीं होने के कारण पशुओं को असहनीय पीड़ा से गुजरना पड़ रहा है। हिसार से श्रीगंगानगर जाने वाले स्टेट हाईवे से बड़ी संख्या में पशुओं को हरियाणा से राजस्थान लाया- ले जाया जाता है। भादरा के गांव सूरतपुरा निवासी पशुपालक पवन जाखड़ और लोकेश बेनीवाल ने बताया कि कई गांवों में लंपी के केस सामने आ चुके हैं। यहां के गांवों और बालसमंद के बीच महज 35 किलोमीटर की दूरी है। ऐसे में सतर्कता जरूरी है। संवाद
क्या है लंपी वायरस
लंपी वायरस, जिसे लंपी स्किन डिजीज वायरस भी कहा जाता है, यह असल में एक प्रकार का पॉक्सवायरस है। इसका संबंध गोट पॉक्स और शीप पॉक्स वायरस की फैमिली से मिला है। यह एक संक्रामक बीमारी है जो एक पशु से दूसरे पशु को होती है। इसकी शुरुआत पशुओं के बालोंं से होती है। इससे बुखार होता है तो त्वचा पर बड़ी गांठें निकल आती हैं। इनसे रेशा गिरता रहता है। पशुओं के थनों में सूजन आ जाती है। इलाज नहीं मिलने पर पशु की मौत हो जाती है।
विज्ञापन


लंपी स्कीन डिजीज के ये हैं लक्षण
-शरीर पर दाने निकलना

-दूध कम देना

-भूख न लगाना

-संक्रमित पशु को बुखार आना

-पशुओं के वजन में कमी

-आंखों से पानी टपकना

-मुंह से लार बहना

ऐसे करें बचाव
- पशुओं को एक जगह से दूसरी जगह न लेकर जाएं।

-संक्रमित पशु को अलग रखें।

-तबेले की साफ सफाई रखें।

-मच्छरों को भगाने के लिए स्प्रे करें।

-संक्रमित पशु को गोट पॉक्स वैक्सीन लगवाएं।

लंपी वायरस संक्रामक है। भादरा तहसील के गांवों में इसके केस मिल रहे हैं। कई गोवंश ठीक भी हो रहे हैं। बालसमंद और भादरा की सीमा सटी हुई है। ऐसे में पशुओं के माइग्रेशन को रोकना जरूरी है, ताकि हरियाणा में इस बीमारी को फैलने से रोका जा सके।
विज्ञापन

-डॉ. संजीव कौशिक, खंड पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भादरा, राजस्थान
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें