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Hisar News: डीसीएम धागा मिल के श्रमिकों ने हड़ताल कर सड़क पर डेढ़ घंटे तक लगाया जाम

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डीसीएम सूत मिल में मांगपत्र तैयार करते श्रमिक।
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हिसार। डीसीएम टेक्सटाइल मिल के श्रमिकों ने रविवार को हड़ताल कर सड़क पर डेढ़ घंटे तक जाम लगा दिया। इस दौरान श्रमिकों ने मिल प्रबंधन पर श्रम कानूनों की अनदेखी और भेदभाव का आरोप लगाया। सूचना पाकर श्रम विभाग के अधिकारी व जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन की मौजूदगी में हुई समझौता वार्ता में मिल प्रबंधन ने 10 दिन में मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। मांगों को पूरा करने और हड़ताल अवधि का वेतन न कटने का आश्वासन मिलने पर श्रमिकों ने हड़ताल समाप्त कर दी। हड़ताल के कारण मिल में एक शिफ्ट में धागा उत्पादन कार्य प्रभावित रहा।
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डीसीएम मिल में रविवार सुबह 7 बजे की पाली समाप्त होते ही ड्यूटी खत्म करके घर जाने वाले और ड्यूटी पर आने वाले श्रमिक मिल के गेट पर एकत्र हो गए और मिल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इसके बाद श्रमिकों ने मिल गेट रोड पर सुबह करीब 9 बजे जाम लगा दिया। जाम की सूचना पाकर काफी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। इस दौरान पुलिस ने जाम लगाने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। चेतावनी के बाद श्रमिकों ने जाम हटा दिया और मिल परिसर में धरने पर बैठ गए। इसके बाद कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों समेत प्रशासनिक अधिकारी भी वहां पहुंचे और प्रबंधन के साथ वार्ता की।
वार्ता में शामिल धागा मिल के प्रबंधक मोनू सिंह और एचआर प्रबंधक विश्वास चंदेल ने कर्मचारियों के अधिकांश आरोपों को नकार दिया। इसके बावजूद उन्होंने वेतन कटौती समेत अन्य व्यक्तिगत समस्याओं को 10 दिन में सुलझाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर नायब तहसीलदार राकेश कुमार, श्रम निरीक्षक संदीप कुमार, पुलिस से मुकेश कुमार, विकास कुमार, संदीप आदि मौजूद रहे।
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श्रमिकों ने प्रबंधन के सामने ये रखीं मांगें
साल में 40 दिन की सीएल व पीएल दी जाए। महिलाओं समेत सभी कर्मियों को हर साल वर्दी व जूता दिया जाए। माह में 26 दिन की उपस्थिति पर देय इनाम बहाल किया जाए। लंबे समय से काम कर रहे अकुशल कामगारों को अर्धकुशल माना जाए। रिंग, फ्रेम और अन्य मशीनों पर बढ़ा हुआ कार्यभार कम किया जाए। महिला कामगारों को रात की ड्यूटी से मुक्त रखा जाए। कामगारों को घर से मिल तक आने-जाने की सुविधा दी जाए। मिल गेट क्षेत्र में स्वीकृत ईएसआई अस्पताल को बहाल किया जाए। कामगारों की समस्या सुलझाने के लिए श्रमिक नेताओं को मान्यता दी जाए। कार्य के दौरान घायल कर्मचारी को नियमानुसार मुआवजा और चिकित्सा सुविधा दी जाए। वेतन का 20 प्रतिशत वार्षिक बोनस दिया जाए।
श्रमिकों ने ये लगाए आरोप
मिल के श्रमिकों ने बताया कि वहां सुबह 7 से 3, 3 से 11, रात 11 से सुबह 7 बजे और 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक चार पाली में ड्यूटी का बोर्ड प्रवेश द्वार पर लगाया गया है, जबकि वहां जाने के बाद काम पूरा होने या प्रतिस्थानी आने पर ही 10-12 घंटे बाद छोड़ा जा रहा है। इससे उनकी कार्यकुशलता पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। धूल भरे कार्य परिवेश के कारण उनके बीमार पड़ने की दर भी सामान्य कामगारों से अधिक है। ईएसआई की मासिक कटौती के बावजूद इलाज के लिए उन्हें 5 किमी दूर दिल्ली रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र में जाना पड़ता है।
यह बोले श्रमिक
मेरा पद चेकर है लेकिन उपस्थिति कार्ड में मेरा पद श्रमिक लिखा जा रहा है। उत्पीड़न के लिए मेरा कार्यस्थल भी आए दिन बदला जा रहा है। प्रबंधन वर्ग से जुड़े कई अधिकारियों को बताने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
– गीता, चेकर
मिल प्रबंधन श्रम कानूनों की अनदेखी कर रहा है। श्रमिकों को उनके हक से वंचित किया जा रहा है। ओवरटाइम का भुगतान सामान्य वेतन से दोगुना दिया जाना चाहिए। वर्दी, बोनस, सुरक्षा और घर से मिल परिसर तक यातायात सुविधा भी मिलनी चाहिए।
– प्रियंका
श्रमिकों के वेतन से एक-एक दिन की अनावश्यक कटौती की गई है। पहले श्रमिकों को इसका पता नहीं चला लेकिन शनिवार को वेतन पर्ची मिलने पर इस कटौती का खुलासा हुआ। कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी के मुताबिक मजदूरी मिलनी चाहिए।
– निर्मला
मैं करीब 15 साल से इस मिल में काम कर रही हूं। पहले जिस मशीन पर हम तीन लोग काम करते थे, अब उसी मशीन पर दो लोगों से काम कराया जा रहा है। दैनिक उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिकतर मशीनों पर काम का बोझ बढ़ा दिया गया है।
– मारिया
मैं लंबे समय से इस मिल में काम कर रहा हूं लेकिन प्रबंधन बदलते ही हर बार नई नीतियां लागू की जा रही हैं। लंबे समय बाद की गई वेतन वृद्धि नाकाफी है। इसके बावजूद प्रबंधन ने कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ा दिया है। यह गलत है।
– अर्जुन
डीसीएम धागा मिल में श्रम कानूनों की अनदेखी की जा रही है। श्रमिकों को संगठित होकर नियमानुसार संघर्ष करना चाहिए लेकिन बिना बताए हड़ताल करना ठीक नहीं है। इससे समस्या का समाधान होने के बजाय परेशानी बढ़ती है।
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– सुरेश कामरेड
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