हरियाणा के हिसार में डीएपी के लिए मारामारी चल रही है। शुक्रवार को मंडी में खाद लेने के लिए किसान सुबह चार बजे लाइन में लग गए थे, लेकिन साढ़े 13 घंटे लाइन में खड़े होने के बाद शाम 5.30 बजे किसानों को खाद मिली। वहीं, कई किसानों को खाद न मिलने पर मायूस होकर लौटना पड़ा।
मंडी में शाम 4.30 बजे 1000 बैग खाद पहुंची थी, जिसे शाम 4.55 बजे बांटने शुरू किया। खाद लेने के लिए रात तक किसानों की लाइन लगी रही। किसानों की भीड़ को देखते हुए पुलिस के पहरे में खाद वितरित की गई। किसान बोले सरसों और गेहूं की बिजाई के लिए उन्हें खाद पर्याप्त नहीं मिल रही है।
किसानों की मानें तो उन्हें खाद के 8 से 10 बैग चाहिए, मगर एक किसान को चार बैग ही दिए गए। पिछले एक माह से मंडी में खाद लेने के लिए चक्कर काट रहे हैं। वहीं लाइन में आगे-पीछे होने पर किसान भी आपस में उलझते रहे। महिलाएं भी खाद लेने के लिए लाइन में लगी रहीं।
एक सप्ताह बाद मंडी में पहुंचे 1000 बैग
नई अनाज मंडी में इससे पहले 18 अक्तूबर को खाद के 1000 बैग पहुंचे थे। उसके बाद खाद लेने के लिए रोजाना किसान मंडी में चक्कर काटते रहे। शुक्रवार को मंडी में लेने के लिए मंडी में 1000 से भी ज्यादा किसान पहुंचे हुए थे।
सुबह छह बजे मंडी में खाद लेने के लिए भूखे-प्यासे लाइन में खड़े हुए थे। शाम को साढ़े 5.30 बजे नंबर आया तो मात्र चार कट्टे मिले। लाइन लगाने के बाद भी किसानों को खाद नहीं मिल रही है।
- रविंद्र राणा, किसान, नियाणा।
गांव में ही किसानों के लिए खाद देने की व्यवस्था होनी चाहिए। खाद लेने के लिए हिसार आना पड़ता है। यहां आते हैं तो लंबी लाइन लगी होती है। पूरे दिन लाइन में खड़े-खड़े थक गए। साढ़े 11 घंटे बाद शाम को खाद मिली।
- सुरत, किसान, मिर्जापुर
खाद के लिए सुबह से शाम तक भूखे लाइन में खड़े रहे। यदि गांव में खाद की व्यवस्था हो तो हिसार आना ही नहीं पड़ेगा। सुबह छह बजे लाइन में खड़े हुए थे। शाम को सिर्फ खाद के चार बैग ही मिल पाए। किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
-रामनिवास पूनिया, किसान, नियाणा
शाम को मंडी में खाद आई थी। आने के 15-20 मिनट किसानों को वितरित करनी शुरू कर दी। रात तक किसानों को खाद के बैग दिए गए। एक सप्ताह बाद मंडी में 1000 बैग आए थे। प्रत्येक किसान को चार बैग दिए गए।
-अनिल कुमार, सेल्समैन, द हिसार कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी, नई अनाजमंडी, हिसार।