पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड अब गेहूं के फानों को जलाने वालों की सेटेलाइट से निगरानी करा रहा है, जिसमें अब तक प्रदेश में 210 से अधिक जगह आग की रिपोर्ट है। ऐसे एरिया की कृषि विभाग के जरिये जांच कराई जाएगी। अगर किसानों की ओर से फाने जलाने की खबर मिली तो किसानों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने हरियाणा में धान की फसलों के बाद इस बार गेहूं की फसलों की निगरानी भी शुरू कराई है। हरियाणा रिमोट सेंसिंग सेंटर के माध्यम से यह डाटा एकत्र किया जा रहा है। अमेरिका के मोडिस और स्वोमी सेटेलाइट के जरिये एक्टिव फायर की घटनाओं की रिपोर्ट ले रहा है, जिसमें 10 एकड़ से अधिक एरिया में आग की घटना की रिपोर्ट उसी दिन मिलती है। इससे छोटे एरिया में आग की घटना की जानकारी इंडियन सेटेलाइट के जरिये पांच दिन बाद मिलती है। इसमें 250 मीटर तक के एरिया में भी आग लगने की सूचना मिल जाएगी। फायर की इन रिपोर्ट को लेकर विभाग पूरा रिकॉर्ड बना रहा है। जिला अनुसार इसकी लिस्ट तैयार की जा रही है। हरसैक की ओर से 15 मई तक आग की घटनाओं का डाटा लिया जाएगा। इसके बाद सभी जिला मुख्यालयों को इसकी रिपोर्ट भेजी जाएगी। अब तक पूरे हरियाणा में आग के करीब 210 से अधिक केस सामने आए हैं। अभी तक हरसैक की ओर से यह नहीं कहा जा सकता है कि यह आग किसानों ने फानों में लगाई। फसल जलने के मामले भी इसमें शामिल हो सकते हैं। ऐसे में हरसैक की रिपोर्ट के बाद स्थानीय अधिकारी अपने एरिया में जांचेंगे कि वहां फसल में आग लगी थी या किसानों ने फाने जलाए थे।
धान की पराली के 20 हजार केस
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने सितंबर से नवंबर तक धान की पराली जलाने की सेटेलाइट से निगरानी की थी, जिसमें 20 हजार से अधिक स्थानों पर आग लगाने के मामले दर्ज किए गए थे। कुल 12.5 लाख हेक्टेयर में धान की खेती थी, जिसमें लोगों ने करीब 2.3 लाख हेक्टेयर धान की पराली में आग लगाई थी। धान की पराली जलाने में कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, फतेहाबाद, सिरसा में सबसे अधिक आग लगाई गई थी।
प्रदेश में इस महीने अब तक कितनी घटनाएं
12 अप्रैल ---------30
13 अप्रैल----------21
14 अप्रैल---------8
15 अप्रैल--------8
16 अप्रैल----------20
17 अप्रैल--------13
18 अप्रैल--------6
19 अप्रैल ---------16
20 अप्रैल----------26
डीसी को जाएगा एसएमएस
हरसैक की ओर से जल्द ही एक सॉफ्टवेयर तैयार किया जाएगा, जिसमें रोजाना हर जिला मुख्यालय की आग की घटना की जानकारी उसी समय संबंधित डीसी को भेेजी जाएगी। इसके बाद डीसी अपने एरिया में इनकी जांच कराएंगे। तब पता लगा सकेगा कि आग के कारण क्या रहे। अगर किसानों की ओर से फाने जलाने की बात साबित हुई तो उन पर जुर्माने का प्रावधान भी है।
15 हजार तक के जुर्माने का प्रावधान
किसानों पर गेहूं के फाने जलाने पर 2500 से 15 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। इसमें दो एकड़ तक फसलों के फाने जलाने पर 2500 रुपये का जुर्माना है। पांच एकड़ तक के फाने जलाने पर पांच हजार रुपये तक का जुर्माना है। 10 एकड़ तक फसल जलाने पर 10 हजार और 15 एकड़ से अधिक फसल के फाने जलाने पर 15 हजार रुपये का जुर्माना तय है।
फाने जलाने को लेकर धारा 144
जिला प्रशासन की ओर से गेहूं के फाने जलाने से रोकने के लिए डीसी की ओर से धारा 144 लागू की गई है। अगर किसान इस धारा का उल्लंघन कर फाने जलाएगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। जुर्माने के अलावा छह महीने तक की कैद का प्रावधान भी किया गया है।
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के प्रोजेक्ट के अनुसार हम गेहूं की फसल को लेकर आग की घटनाओं का रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं। सेटेलाइट के जरिये यह डाटा लिया जा रहा है, जिसमें हर रोज की प्रोग्रेस रिपोर्ट तैयार की जा रही है। 15 मई तक इस तरह से निगरानी करेंगे।
- डॉ. आरएस हुड्डा, चीफ साइंटिस्ट, हरसैक