प्रिया परिवार के 300 करोड़ के चिटफंड घोटाले के मामले में स्टेट क्राइम ब्रांच ने झुंझूनूं के गोठड़ा गांव निवासी सुरेंद्र नूनिया को झुंझुनूं जिले से गिरफ्तार कर लिया है। क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार अभियुक्त को हिसार कोर्ट में पेश कर चार दिन के रिमांड पर लिया है। अभियुक्त काफी दिनों से भगोड़ा चल रहा था। पुलिस नूनिया से इस मामले से जुड़े अन्य दो भगोड़ों के बारे में जानकारी हासिल करेगी और घोटाले में पूछताछ करेगी।
मामले की शिकायत जवाहर नगर निवासी आरएन शर्मा ने दी थी, जिसके आधार पर सिटी पुलिस हिसार ने 19 जून 2014 को केस दर्ज किया था। सिटी थाना पुलिस ने मामले में सुरेंद्र नूनिया सहित महेश, सोमबीर, तेजपाल, जनाऊखारी निवासी सज्जन सिंह व जटावा खुर्द निवासी सत्यप्रकाश के खिलाफ केस दर्ज किया था।
तीन पहले ही हो चुके गिरफ्तार, तीन थे भगोड़े
छह लोगों पर दर्ज इस केस में हिसार पुलिस ने एमडी महेश, सोमबीर व तेजपाल को गिरफ्तार कर लिया था। ये भी तीनों काफी दिनों से भगोड़े चल रहे थे। इनकी गिरफ्तारी के बात तीन और मुख्य अभियुक्त भगोड़े रहे। इनमें एमडी सुरेंद्र नूनिया, सत्यप्रकाश व सज्जन शामिल थे। नूनिया की गिरफ्तारी के बाद स्टेट क्राइम ब्रांच को दो और भगोड़ों की तलाश है।
राजस्थान, हरियाणा के कई जिलों में केस दर्ज
प्रिया परिवार के एमडी व कंपनी का संचालन करने वाले छह लोगों पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई केस दर्ज हुए थे। राजस्थान में भी इन पर धोखाधड़ी सहित चिट फंड घोटाले के केस दर्ज हैं। इसके अलावा हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी, दादरी, रेवाड़ी सहित कई जिलों में भी केस दर्ज है। हिसार में सिटी एरिया स्थित रेड स्क्वेयर मार्केट में इनका ऑफिस था।
राशि पर अधिक ब्याज देने का झांसा देकर करते थे ठगी
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि प्रिया परिवार कंपनी के अधिकारी राशि पर अधिक ब्याज देने के नाम पर ठगी करते थे। ये कम समय में दोगुनी राशि करने का झांसा देते थे। शिक्षण संस्थान व यूनिवर्सिटी खोलने में निवेश करने के साथ ही कम समय में चार गुणा तक राशि करने के दावे किए गए।
पहला मामला राजस्थान में 2011 में हुआ था दर्ज, अब 70 से ज्यादा मामले
शिकायतकर्ताओं ने बताया था कि सबसे पहले कंपनी के खिलाफ राजस्थान में मामला दर्ज हुआ था। यह वर्ष 2011 का मामला था। इसके बाद लोगों को कंपनी द्वारा की जा रही ठगी के बारे में पता चला। लोगों ने कंपनी से अपने रुपये निकलवाने के प्रयास शुरू कर दिए मगर उन्हें रुपये नहीं मिले। फिर लोगों ने एक के बाद एक कर कंपनी के खिलाफ अलग अलग जगहों पर देश भर में 70 से अधिक केस दर्ज करवा दिए।
कंप्यूटर शिक्षा के नाम करोड़ों की ठगी
कंप्यूटर शिक्षा के नाम पर लोगों से रुपये निवेश कराकर प्रिया परिवार ने लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की। चेन सिस्टम के नाम पर कंप्यूटर शिक्षा के साथ-साथ गाड़ी, मोटरसाइकिल आदि देने का झांसा देकर कंपनी निवेशकों के करोड़ों रुपये हड़प गई। राजस्थान के झुंझुनूं जिले से शुरू हुआ यह गोरखधंधा देश के कई राज्यों में फैल गया। जल्द ही इसकी सच्चाई सामने आने पर पर निवेशकों ने कंपनी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किए। छह दिसंबर 2011 को जयपुर में विद्याधर नगर स्थित प्रिया परिवार के कार्यालय के सामने निवेशकों ने प्रदर्शन किया।
2011 में फूटा आक्रोश
सात दिसंबर 2011 को सीकर व झुंझुनूं में प्रिया परिवार के खिलाफ लोगों का आक्रोश फूटा व लोगों ने कलक्टर व एसपी से शिकायत की। 11 दिसंबर को प्रिया परिवार के चेयरमैन व निदेशक तेजपाल नूनिया, सुरेंद्र नूनिया व महेश नूनिया को सीकर पुलिस ने गिरफ्तार किया। 12 दिसंबर को झुंझुनूं स्थित कार्यालय को सीज किया गया व रिकॉर्ड जब्त किए गए। 13 दिसंबर को उदयपुरवाटी पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया। इसके बाद जगह-जगह मामले दर्ज कराये गए।
तीन लाख से अधिक सदस्य
गोल्ड सुख ठगी प्रकरण आने के बाद राजस्थान सरकार ने झुंझुनूं की नेटवर्किंग / मार्केटिंग कंपनियों के नाम, पते, बोर्ड के सदस्यों व कुल सदस्यों की संख्या समेत कई जानकारी जुटाई थी। वर्ष 2011 में प्रिया परिवार के सदस्यों की संख्या करीब तीन लाख थी। सदस्यों ने कंपनी में बड़ी संख्या में रुपये निवेश कर रखे थे।
पांच राज्यों में फैला हुआ है नेटवर्क
तेजपाल नूनियां, महेश नूनिया और सुरेंद्र नूनिया ने मिलकर प्रिया परिवार की स्थापना की थी। जल्द ही इनका नेटवर्क राजस्थान और इससे समीपवर्ती राज्यों में फैल गया। राजस्थान के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में प्रिया परिवार का नेटवर्क है। वर्ष 2009 में प्रिया परिवार के जयपुर स्थित मुख्यालय व झुंझुनूं में दो नंबर रोड स्थित कार्यालय पर आयकर विभाग ने छापा मारा था। बाद में विभाग को लगभग तीन करोड़ रुपये जमा करवाए गए थे।