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एटीएम क्लोनिंग के जरिए फौजियों से लाखों की ठगी

Wed, 04 Nov 2015 01:16 AM IST
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
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सेना के जवानों के सैलरी अकाउंट से लाखों रुपये निकालने के मामले से कैंट में हड़कंप मच गया है। आशंका जताई जा रही है कि कोई व्यक्ति एटीएम क्लोनिंग के जरिए उनके खातों से रुपये निकाल रहा है
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अभी तक 20 से अधिक जवानों के साथ इस तरह का साइबर क्राइम हुआ है। वारदात के बाद से जवानों ने अपने-अपने अकाउंट खाली करने शुरू कर दिए हैं। पिछले तीन दिनों से लगातार ऐसी वारदात हो रही है।

पुलिस को शक है कि कैंट एरिया के सामने लगी एटीएम मशीनों पर क्लोनर डिवाइस लगाया गया है। वहीं से फौजियों के एकाउंट की हू-ब-हू पिक्चर तैयार कर क्लोन एटीएम कार्ड बनाया जा रहा है।
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इस क्लोन एटीएम कार्ड का सहारा लेकर शातिर बदमाश शहर के जिंदल चौक, आजाद नगर और सेक्टर 13 सहित दिल्ली रोड के आसपास के एटीएम से रुपये निकाल रहे हैं।

फौजी बोले, न नंबर बताया, न एटीएम कार्ड किसी को दिया फिर कैसे हुई ठगी
फौजियों ने बताया है कि उन्होंने किसी को न तो एटीएम कार्ड का सिक्योरिटी कोड नंबर बताया और न ही एटीएम कार्ड किसी को दिया गया। आखिर उनके खातों से रुपये कैसे निकले

कैंट चौकी एरिया पुलिस ने मंगलवार को 9 लोगों की शिकायत पर केस दर्ज किया है। किसी के 65 हजार रुपये तो किसी के 35 हजार रुपये निकाले गए हैं। वारदात 31 अक्तूबर की आधी रात से शुुरू हुई और लगातार हो रही है।

मंगलवार को फिर निकाले 15 सौ रुपये
एक जवान ने बताया है कि उसने इस सूचना के बाद अपने खाते से रुपये निकाल दिए। उसके साथ भी ऐसा होता है कि नहीं, उसने यह देखने के लिए खाते में 18 सौ रुपये छोड़ दिए। मंगलवार को ही उसके खाते से 15 सौ रुपये निकल गए।

जानिए कैसे लगाया क्लोनिंग डिवाइस
इंडियन साइबर आर्मी के डायरेक्टर एंड चीफ सिक्योरिटी एनालिसिस किसले चौधरी के अनुसार इस मामले में 100 प्रतिशत क्लोनिंग के जरिए रुपये निकले हैं

उन्होंने दावा किया है कि वह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि कोई बैंक कर्मचारी या साइबर और टेक्निकल एक्सपर्ट हो सकता है।

साइबर एक्सपर्ट ने दावा किया है कैंट एरिया के आसपास जहां जवान सबसे अधिक एटीएम कार्ड यूज करते हैं उसी एटीएम मशीन पर क्लोनर डिवाइस लगाया गया होगा। या फिर कैंट के अंदर लगे किसी एटीएम मशीन पर क्लोनर डिवाइस लगाया गया होगा।

कैसे काम करता है क्लोनर डिवाइस
साइबर एक्सपर्ट के अनुसार यह मशीन में एटीएम कार्ड डालने वाले स्थान पर लगाया जाता है। जैसे पैन के ऊपर कैप लगाते हैं उसी तरह यह उस स्थान पर लग जाता है। आम आदमी इसे पहचान नहीं सकता

शातिर उसे उसी मशीन के रंग के अनुरूप बनाते हैं जो मशीन का ही पार्ट लगता है। जब उपभोक्ता अपना कार्ड मशीन में डालता है तो यह डिवाइस कार्ड कॉपी कर लेता है।

कार्ड डालने के बाद जब पासवर्ड डालेंगे तो यह उसे भी कॉपी कर लेगा। इस दौरान कभी पेमेंट नहीं निकलती। एटीएम पेमेंट रिजेक्ट दिखाएगा। उपभोक्ता सोचेगा शायद पैसे नहीं इसलिए रिजेक्ट हो गया और एटीएम कार्ड बाहर निकल जाएगा। वह फिर दूसरा एटीएम तलाश करेगा।

अभी मामला समझ नहीं आ रहा, छानबीन चल रही है। क्लोनिंग का मामला भी हो सकता है। साइबर एक्सपर्ट का सहयोग लिया जाएगा। कैंट एरिया के सामने लगे एटीएम मशीनों की जांच के लिए बैंक अधिकारियों से संपर्क किया जाएगा।
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- ईश्वर, इंचार्ज कैंट चौकी
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