एडीजे अजय पराशर की अदालत ने हत्या, शव खुर्द-बुर्द करने और आगजनी के एक मुकदमे में गांव उमरा निवासी दो भाइयों बलराम, मंजीत उर्फ मंजू और ढाणी सांकरी आश्रम के साधु संदलाना निवासी महाबीर को सिसाय निवासी राज सुरेंद्र सिंह की हत्या के जुर्म में दोषी करार दिया है। अदालत दोषियों को बुधवार को सजा सुनाएगी।
सिविल लाइन पुलिस ने इस संबंध में 4 सितंबर 2015 को केस दर्ज किया था। सिसाय निवासी किसान राज सुरेंद्र सिंह परिवार समेत डिफेंस कॉलोनी में रहता था। उनके बेटे अमित कुमार ने कोर्ट कांप्लेक्स चौकी में शिकायत देकर पिता की गुमशुदगी का केस दर्ज कराया था। राज सुरेंद्र सिंह बोलेरो लेकर निकला था कि लौटा नहीं था। पुलिस ने गुमशुदगी का केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई तो उनकी गाड़ी जली हालत में मुजादपुर में ड्रेन के पास मिली थी। इससे रहस्य गहरा गया था। पुलिस ने अपनी जांच आगे बढ़ाई थी।
सबूत मिटाने के लिए जला दी थी गाड़ी
पुलिस ने जांच आगे बढ़ाते हुए मृतक के मोबाइल की कॉल डिटेल के आधार पर ढाणी सांकरी के शिव आश्रम के साधु संदलाना निवासी महाबीर सिंह और उमरा के बलराम को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। तब महाबीर सिंह ने खुलासा किया था कि उसने और उसके चेले बलराम ने घटना वाली रात राज सुरेंद्र के साथ डेरे में शराब पी थी।
नशा होने पर वह उसे गालियां देने लगा। बात बढ़ने पर उसने और बलराम ने तेज धारदार हथियार से वार कर उसकी हत्या कर दी थी। डेरे में जमीन खोदकर शव दबा दिया था। फिर वे गाड़ी को मुजादपुर में ड्रेन के पास ले गए थे और सबूत मिटाने के लिए गाड़ी जला दी थी। उसके बाद हमने फोन कर बलराम के भाई मंजीत से बाइक मंगाई थी और वे उस पर लौटे थे।
जेल में हुई थी दोस्ती
साधु महाबीर ने पूछताछ में बताया था कि 1999 में वह और राज सुरेंद्र जेल में थे। वह सजा काटकर बाहर आ गया और ढाणी सांकरी में शिव आश्रम में रहने लगा। राज सुरेंद्र भी बाहर आ गया था। वह बाद में डेरे में आता-जाता रहता था। घटना वाले दिन राज सुरेंद्र ने उसे फोन कर कहा था कि कहां हो, हिसार कोर्ट में आ जाओ। फिर वह और बलराम कोर्ट परिसर में कार में आए थे। फिर वे यहां से ढाणी सांकरी में गए थे। वहां रात को शराब पीने के बाद कहासुनी होने पर वारदात को अंजाम दिया गया था।
तीन आरोपी हुए थे गिरफ्तार
सिविल लाइन पुलिस ने जमीन खोदकर शव बाहर निकाला था। पुलिस ने गुमशुदगी के केस में हत्या, शव खुर्द-बुर्द करने और आगजनी की धारा जोड़ दी थी। पुलिस ने हत्या आरोपी साधु महाबीर और उमरा निवासी बलराम के अलावा उनकी मदद करने वाले बलराम के भाई मंजीत को दोषी माना है। अदालत तीनों को बुधवार को सजा सुनाएगी।