अतिरिक्त सत्र एवं न्यायाधीश बसरुद्दीन की कोर्ट ने किन्नर गांव में महिला गीता की कस्सी से काटकर हत्या के दोषी मृतका की बहन सुनीता देवी और जीजा रामनिवास को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
सजा के अलावा कोर्ट ने दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 29 अगस्त 2014 को नारनौंद थाने में हत्या का केस दर्ज हुआ था।
कोर्ट में चले अभियोग के अनुसार नारनौंद थाने में शिकायत देने वाली मृतका की बेटी अन्नू ने बताया था कि पिता पवन की मौत के बाद मां गीता को सामाजिक रूप से ताऊ रामनिवास के नाम की चुनरी ओढ़ा दी गई थी।
रामनिवास पहले से उसकी मौसी सुनीता के साथ शादीशुदा था। बाद में रामनिवास की गीता के साथ शादी होने के बाद एक बेटी पैदा हुई।
मृतका की बेटी का कहना था कि अक्सर रामनिवास और गीता के बीच छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई झगड़ा होता रहता था।
29 अगस्त 2014 को रात को ताऊ रामनिवास ने मौसी सुनीता के साथ मिलकर घर के आंगन में सो रही मां गीता पर कस्सी से वार कर उसकी हत्या कर दी।
हत्या की वारदात के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। कोर्ट ने गत चार दिसंबर को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था।
सोमवार को इस मामले में दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों को एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
जुर्माना न देने पर एक एक साल की अतिरिक्त कैद काटनी होगी। कोर्ट ने जुर्माने की 95 प्रतिशत राशि पीड़ित परिवार को देने के आदेश दिए हैं।