हरियाणा के हिसार जिले के हांसी क्षेत्र के गांव भाटला में जुलाई 2017 के सामाजिक बहिष्कार प्रकरण में दर्ज मुकदमे में हिसार की अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत स्थापित विशेष अदालत द्वारा तलब छह आरोपियों में से एक आरोपी पुनीत पूर्व सरपंच प्रतिनिधि ने मंगलवार को हिसार की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर अदालत ने आरोपी पुनीत को जमानत पर रिहा कर दिया।
पीड़ितों के अधिवक्ता रजत कल्सन ने बताया कि पुलिस की विशेष जांच टीम ने भाटला सामाजिक बहिष्कार प्रकरण में सदर में सरपंच प्रतिनिधि पुनीत समेत सात आरोपियों के खिलाफ, 27 अनुसूचित जाति के लोगों की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया था। परंतु विशेष जांच टीम ने केवल एक आरोपी चंद्र फौजी को दोषी मानते हुए और बाकी छह को निर्दोष मानते हुए अदालत में चालान दे दिया था।
इसके बाद हिसार की एससी/एसटी एक्ट के तहत स्थापित विशेष अदालत के जज डीआर चालिया ने बाकी के छह आरोपियों पुनीत कुमार, जय किशन, सुमेरु पंडित, लीला, साधु व रामचंद्र को मुकदमा में प्रथम दोषी मानते हुए पीड़ित पक्ष की याचिका पर 3 अगस्त 2018 तलब किया था। इसके बाद उन्होंने उक्त आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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यह पिटीशन भी हाईकोर्ट ने एक दिसंबर 2021 को खारिज कर दी थी। इन आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका भी विशेष अदालत ने खारिज कर दी। बाद में हाईकोर्ट ने हिसार की विशेष अदालत को आरोपियों की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सतेंद्र कुमार अंतिल के 2021 के फैसले की गाइडलाइन के मद्देनजर निर्णय लेने को कहा था।
इसके चलते आरोपी पुनीत ने हिसार की विशेष अदालत के समक्ष मंगलवार को आत्मसमर्पण किया। गौरतलब है कि भाटला में 3 जुलाई 2017 को गांव के लोगों ने एससी-एसटी एक्ट के एक मुकदमे में समझौता न किए जाने को लेकर चौकीदार से मुनादी कराकर गांव के अनुसूचित जाति का सामाजिक बहिष्कार कर दिया था जिस मामले में यह मुकदमा दर्ज हुआ था।