अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर को विजिलेंस टीम ने ढाई हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। विजिलेंस टीम ने ऑपरेटर को दोपहर बाद निगम कार्यालय की ऊपरी मंजिल से काबू किया है। आरोप है कि कंप्यूटर ऑपरेटर कुलदीप ढांडा मिलगेट निवासी व्यक्ति को प्लॉट की एनओसी देने के नाम पर रिश्वत की मांग कर रहा था। शहर की नई सरकार की पहली बैठक के अगले दिन ही भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ होने से निगम कार्यालय में हलचल मच गई है। कई अधिकारियों व कर्मचारियों के चेहरों पर भी पसीना आ गया। मेयर गौतम सरदाना ने भी बुधवार को बिल्डिंग ब्रांच के सभी अधिकारियों को तलब कर लिया है। उधर, मामला सामने आते ही बिल्डिंग ब्रांच का एक अधिकारी छुट्टी मांगने के लिए उच्चाधिकारियों के पास पहुंच गया। हालांकि अभी छुट्टी फाइनल नहीं हो पाई है। आरोपी पर भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 7, 13 के तहत केस दर्ज कर लिया है। उसे बुधवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
पहले मांगे थे तीन हजार, बाद में ढाई हजार में तय हुई बात
दरअसल, मिलगेट क्षेत्र के शिव नगर निवासी शमशेर की मां के नाम प्लॉट है। उनको अब प्लॉट बेचना है। इसलिए उसने प्लॉट की एनओसी लेने के लिए नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच में आवेदन दिया था। उसने एनओसी के लिए सरकारी फीस 26 हजार 266 रुपये भी जमा करवा दिए थे। इसके बाद उसे तीन-चार दिन से लगातार चक्कर कटवाए जा रहे थे। शमशेर ने जब ब्रांच के ही एक क्लर्क से इस बारे में बात की तो उसने खर्चा-पानी के रूप में तीन हजार रुपये मांगे। बाद में ढाई हजार रुपये में बात तय हो गई। इसी बीच शमशेर ने इसकी शिकायत विजिलेंस टीम को कर दी। विजिलेंस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार विनय चौधरी के साथ इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र के नेतृत्व में टीम निगम कार्यालय भेज दी।
लाल पाउडर लगाकर दिए रुपये
निगम कार्यालय पहुंचकर टीम में शामिल सदस्यों ने इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र, एएसआई मनमोहन, ईएचसी धर्मवीर व प्रदीप कुमार और हेड कांस्टेबल अनिल कुमार ने एक नोट दो हजार रुपये और एक नोट 500 रुपये का शमशेर को लाल पाउडर लगाकर दे दिए। जैसे ही शमशेर ने फाइल में ढाई हजार रुपये डालकर कुलदीप को थमाए तो इशारा पाकर विजिलेंस टीम ने उसे दबोच लिया। इसी बीच ड्यूटी मजिस्ट्रेट व अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और ऑपरेटर कुलदीप को अपने साथ लघु सचिवालय स्थित विजिलेंस कार्यालय ले आए।
बीच में हटा दिया था, मंत्री की सिफारिश पर दोबारा लगा था ऑपरेटर
सूत्रों के अनुसार ऑपरेटर कुलदीप काफी साल पहले निगम कार्यालय में लगा था। मगर डेढ़ साल पहले उसे निगम प्रशासन द्वारा नौकरी से हटा दिया गया था। उसके बाद एक मंत्री की सिफारिश पर उसे दोबारा से नौकरी पर रखा गया था। जब दोबारा नौकरी पर रखा गया, उस समय ही कुलदीप को बिल्डिंग ब्रांच में लगाया गया था।
एक क्लर्क ने कहा था कुलदीप को दे देना पैसे
शिकायतकर्ता शमशेर का आरोप है कि उससे एक क्लर्क ने रुपये मांगे थे। उसी क्लर्क ने कहा था कि ढाई हजार रुपये कुलदीप को दे देना। मगर जब विजिलेंस टीम ने कार्रवाई की तो समय वह क्लर्क वहां नहीं था। हालांकि बाद में निगम कार्यालय आए क्लर्क के चेहरे की हवाइयां भी उड़ी हुई थीं। विजिलेंस कार्रवाई का डर क्लर्क में भी आसानी से देखा जा सकता था।
डीसी रेट पर लगे कर्मियों के पास महंगे फोन देखकर अन्य कर्मचारी पूछते थे कहां से लाए
नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच के कच्चे कर्मचारियों के पास अक्सर महंगे फोन देखने को मिलते हैं। विशेष बात यह है कि इन कर्मचारियों को तनख्वाह डीसी रेट के हिसाब से ही मिलती है। अन्य ब्रांचों में लगे कच्चे कर्मचारी जब इनके पास महंगे फोन देखते हैं तो वह भी पूछते हैं कि इस सैलरी में महंगे फोन कहां से लाए। उनको अटपटा सा जवाब देकर कर्मचारी हंसकर बातों को टाल देते हैं।
कंप्यूटर ऑपरेटर को एनओसी देने के नाम पर ढाई हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में काबू किया है। उस पर केस दर्ज कर लिया है। उसे बुधवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
-सुभाष चंद्र, इंस्पेक्टर, विजिलेंस
नगर निगम में भ्रष्टाचार संबंधी पहले भी शहरवासी शिकायत करते रहे हैं। अब सिस्टम को सुधार करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। मैंने सुबह ही बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों को तलब किया है।
-गौतम सरदना, मेयर, नगर निगम