अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। ट्रेड मार्ट फ्रॉड केस में पुलिस को सॉफ्टवेयर बनाने वाले इंजीनियर व उस लैपटॉप की तलाश है, जिसके जरिये लोगों से करोड़ों रुपये ठगे गए। पुलिस का मानना है कि इसी सॉफ्टवेयर के जरिये लोगों के साथ फर्जीवाड़ा किया गया है। कंपनी में पैसा लगाने वालों को इसी सॉफ्टवेयर से संदेश भेजा जाता था कि आपका पैसा कंपनी के पास जमा हो गया है और जल्द ही आपको रिवॉर्ड मिलना शुरू हो जाएगा। इसके अलावा निवेशक जब सॉफ्टवेयर में अपना अकाउंट लॉग-इन करते थे, तो उनको यह दिखाया जाता था कि उनके नीचे हजारों लोग चेन में जुड़ चुके हैं। मगर असल में यह सब बोगस होता था। शुरू में यह कुछ लोगों का ही रिकॉर्ड संभाल सकता था, लेकिन जब कंपनी में निवेश करने वाले की संख्या बढ़ने लगी तो आरोपियों ने इस सॉफ्टवेयर को दो बार अपडेट भी करवाया। आरोपी सॉफ्टवेयर को पुलिस में मामला दर्ज होने से पहले ही डिलीट कर चुके हैं। पुलिस ने इस मामले में सॉफ्टवेयर चलाने वाली कंपनी याहू से भी इस बारे में जानकारी मांगी है। पुलिस के अनुसार जब कोई निवेशक आरोपियों को पैसा देता था तो कंपनी के साफ्टवेयर टीएमटी की तरफ से उनके फोन पर मैसेज जाता था। इस मैसेज का बैंक से कोई लेना देना नही होता था। आरोपियों ने अपनी कंपनी को दिल्ली में रजिस्टर्ड करवाया हुआ है, लेकिन इस सॉफ्टवेयर का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। कंपनी पर बाजार से नकद पैसा लेने पर प्रतिबंध था। इसके बावजूद आरोपियों ने सॉफ्टवेयर के माध्यम से बिना कोई सामान बेचे करोड़ों रुपये इकट्ठा कर लिए। पुलिस इस मामले में मुख्य आरोपी शमशेर व आनंद पाल के अलावा उस इंजीनियर की भी तलाश है, जिसने यह सॉफ्टवेयर बनाया है। इसके अलावा वह लैपटॉप भी पुलिस को अभी तक नहीं मिला है, जिसके जरिये यह मैसेज निवेशकों को भेजे जाते थे।
आरोपियों ने दो महीने में बांट दी 30 ब्रेजा गाड़ी व 60 से ऊपर बुलेट
फर्जी कंपनी के संचालकों ने करीब दो महीने में ही 30 से ज्यादा ब्रेजा गाड़ी उसमें निवेश करने वालों को बांट दी थी। इसके अलावा करीब 60 से भी ज्यादा बुलेट बाइक बांटने का रिकॉर्ड भी पुलिस के हाथ लगा है। पुलिस उन सभी का डाटा इकट्ठा कर रही है, जिनको यह सब इनाम के रूप में दिए गए हैं। जींद के नरवाना से एक एजेंसी से पुलिस को दो महीने में 17 से ज्यादा ब्रेजा गाड़ी बेचने का रिकॉर्ड मिला है। पुलिस ने वहां से उन सभी का रिकार्ड जब्त कर लिया है।
हिसार पुलिस के पास पहुंचे सौ से ज्यादा शिकायतकर्ता
फ्रॉड केस से पर्दा उठने के बाद हर रोज पुलिस के पास शिकायतकर्ता पहुंच रहे हैं। अब इनकी संख्या 100 से भी पार पहुंच रही है। नियमों के अनुसार सभी को एक ही शिकायत में दर्ज किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार सभी निवेशकों के बैंक खातों की डिटेल ली जा रही है और उनके फोन पर आए मैसेज का रिकॉर्ड भी लिया जा रहा है। पुलिस ने आरोपियों के तीन बैंक खातों को सीज करवाकर उसका रिकॉर्ड जब्त कर लिया है। करीब दो महीनेे के लेनदेन की डिटेल में करीब दो हजार पेज पुलिस को मिले हैं। इन पेज का पुलिस टीम जांचने में जुटी हुई है। पुलिस के अनुसार अलग-अलग जिलों में इनके खिलाफ कई केस दर्ज हो चुके हैं, इसलिए कुल फ्रॉड राशि का अभी पता नहीं चल पाया है। आरोपियों ने ज्यादातर लेनदेन नगदी में किया है।
मुख्य आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीमें छापेमारी कर रही है। सॉफ्टवेयर बनाने वाले इंजीनियर और उस लैपटॉप की भी तलाश की जा रही है, जिससे यह मैसेज निवेशकों को भेजे जा रहे थे। मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही टोटल फ्रॉड का पता चला पाएगा। आरोपियों नेे पहले ही भागने की तैयारी कर रखी थी, इसलिए रिकॉर्ड जुटाने में मुश्किलें आ रही हैं।
-भगवान दास, एसआईटी सदस्य